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This Article is From Aug 22, 2025

'नक्सलवाद के लिए सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया', विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर शाह का बड़ा बयान

अमित शाह ने सुदर्शन रेड्डी के सुप्रीम कोर्ट में जज रहते दिए गए फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वामपंथी दलों के दबाव में कांग्रेस ने एक ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, जिसने नक्सलवाद का समर्थन किया और सुप्रीम कोर्ट जैसे पवित्र मंच का इस्तेमाल किया.

'नक्सलवाद के लिए सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया', विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर शाह का बड़ा बयान
  • गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाया..
  • शाह ने आरोप लगाया कि वामपंथी उग्रवाद, नक्सलवाद का समर्थन करने के लिए रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया.
  • कहा- अगर जज रहते उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला न सुनाया होता तो माओवाद 2020 से पहले ही खत्म हो गया होता.
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केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने विपक्षी गठबंधन की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी पर नक्सलवाद का ‘समर्थन' करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जज रहते सलवा जुडूम पर फैसला नहीं सुनाया होता, तो देश में माओवाद 2020 से पहले ही खत्म हो गया होता.

'सुदर्शन रेड्डी ने नक्सलवाद की मदद की'

केरल के कोच्चि में मलयाला मनोरमा के एक कार्यक्रम में अमित शाह ने सलवा जुडूम पर 2011 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, ‘‘सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने नक्सलवाद की मदद की. उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला सुनाया. अगर सलवा जुडूम पर फैसला नहीं सुनाया गया होता तो नक्सली आतंकवाद 2020 तक खत्म हो गया होता. वह वही व्यक्ति हैं, जो सलवा जुडूम पर फैसला देने वाली विचारधारा से प्रेरित थे.''

जस्टिस रेड्डी ने क्या फैसला दिया था?

दिसंबर 2011 में, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रेड्डी ने फैसला सुनाया था कि माओवादी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में आदिवासी युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारियों के रूप में इस्तेमाल करना- चाहे उन्हें 'कोया कमांडो' कहा जाए, सलवा जुडूम कहा जाए या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए - गैरकानूनी और असंवैधानिक है. उन्होंने यह आदेश भी दिया था इनसे तुरंत हथियार ले लिए जाएं.

'नक्सलवाद के समर्थन के लिए कोर्ट का इस्तेमाल'

कॉन्क्लेव के दौरान सवाल जवाब सत्र में गृह मंत्री शाह ने कहा कि  केरल भी नक्सलवाद और उग्रवाद से पीड़ित रहा है. केरल के लोग देख सकते हैं कि कैसे वामपंथियों के दबाव में कांग्रेस ने एक ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है, जिसने वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद का समर्थन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पवित्र मंच का उपयोग किया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस द्वारा ऐसा उम्मीदवार चुने जाने से केरल में पार्टी की जीत की संभावना और कम हो गई है.

सत्तारूढ़ एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैकग्राउंड वाले तमिलनाडु के वरिष्ठ भाजपा नेता हैं. वहीं कांग्रेस की अगुआई वाले विपक्षी गठबंधन ने जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना प्रत्याशी बनाया है. 

'वोट चोरी का आरोप लगा बेवजह विवाद'

'वोट चोरी' के आरोप पर गृह मंत्री ने कहा कि राहुल के कांग्रेस नेतृत्व में शामिल होने के बाद, वे संवैधानिक मामलों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं. बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का जिक्र करते हुए शाह ने कांग्रेस पर इसे लेकर बेवजह विवाद पैदा करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास निर्वाचन क्षेत्र, जिला और राज्य स्तर पर आपत्तियां उठाने का अवसर था, लेकिन उसने अब तक एसआईआर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

'मर चुके वोटरों के नाम हटने चाहिए या नहीं'

अन्य राज्यों में एसआईआर कराए जाने के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि यह निर्वाचन आयोग को तय करना है. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने पूरे देश में एसआईआर कराने का फैसला किया है. बिहार की मतदाता सूची में ऐसे 22 लाख लोगों के नाम थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है. फर्जी वोट डाले जाने की संभावना है, तो क्या उनके नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं? यह सामान्य ज्ञान की बात है.

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