- टीएमसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया है.
- प्रस्ताव में सात आधार बताए गए हैं जिनके आधार पर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई है.
- लोकसभा में 130 सांसदों और राज्यसभा में 63 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर अपने हस्ताक्षर किए हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ टीएमसी के नेतृत्व में विपक्ष ने हटाने का प्रस्ताव पेश किया है. लगभग 10 पन्नों के नोटिस में सात आधार बताए गए हैं, जिनके आधार पर सीईसी को पद से हटाने की मांग की गई है. लोकसभा में दिए गए नोटिस पर 130 सांसदों के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जबकि राज्यसभा में दाखिल प्रस्ताव पर 63 सांसदों ने दस्तखत किए हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के नोटिस पर अखिलेश यादव ने कहा कि हम और हमारी पार्टी इसका समर्थन करती है, क्योंकि चुनाव आयोग हमारी बात नहीं सुन रहा है. उत्तर प्रदेश में हमारे कैमरों ने वह सब रिकॉर्ड किया है जो कुछ भी हुआ. उपचुनाव को लूट लिया गया. उस समय चुनाव आयोग क्या कर रहा था. हम लोकसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे.
#WATCH | Lucknow | On impeachment motion against CEC, Samajwadi Party president Akhilesh Yadav says,"...Our party is in favour of it because the Election Commission does not listen to us. The whole by-election was looted. We will raise the issue of how a DM took a bribe and… pic.twitter.com/6sa6kqst12
— ANI (@ANI) March 13, 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है ?
संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है. इस अनुच्छेद के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए वैसी ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने की होती है. सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को उसके पद से हटाने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 124 (4) में किया गया है. इसमें साफ किया गया है कि जज को केवल दो आधार पर ही हटाया जा सकता है - दुर्व्यवहार और कार्य निष्पादन में अक्षमता. 124 (5) के मुताबिक संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत के द्वारा एक प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रपति को किसी जज को हटाने की सिफारिश की जा सकती है. इस पूरी प्रक्रिया का कोई नाम तो नहीं दिया गया है लेकिन आम तौर पर इसे महाभियोग प्रस्ताव के नाम से जाना जाता है.
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