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'ये चुनाव नहीं, देश बचाने का समय': ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बड़ा बयान, BJP पर तीखा हमला

अखिलेश यादव ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब मुद्दा केवल चुनावी प्रक्रिया को बचाने का नहीं, बल्कि पूरे देश को बचाने का है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश गलत हाथों में चला गया है और संविधान व लोकतंत्र पर सीधा हमला किया जा रहा है.

'ये चुनाव नहीं, देश बचाने का समय': ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बड़ा बयान, BJP पर तीखा हमला
  • अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल जाकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की और उनका अभिनंदन किया.
  • अखिलेश ने बीजेपी पर तीखा आरोप लगाते हुए देश को बचाने की बात कही.
  • उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव से पहले ईवीएम के खिलाफ आवाज उठाई और बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की
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लखनऊ:

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को पश्चिम बंगाल पहुंचकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की. इस दौरान अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी को शॉल ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया और कहा, “आप हारी नहीं हैं.” इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट साझा कर बीजेपी पर तीखा हमला बोला.

अखिलेश यादव ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब मुद्दा केवल चुनावी प्रक्रिया को बचाने का नहीं, बल्कि पूरे देश को बचाने का है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश गलत हाथों में चला गया है और संविधान व लोकतंत्र पर सीधा हमला किया जा रहा है. अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव लगातार ईवीएम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि चाहे उनकी पार्टी सभी सीटें जीत जाए, फिर भी वे बैलट से चुनाव की मांग पर कायम रहेंगे. अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों को भी खुलकर धांधली करार दिया है.

अखिलेश यादव का एक्स पोस्ट

प्रिय देशवासियों, आज प. बंगाल आकर चुनाव की महाधांधली और महाबेईमानी के बारे में जानकर ये लगा कि अब बात केवल चुनाव की प्रक्रिया को बचाने की नहीं है, देश को बचाने की है. आज देश उन गलत हाथों में चला गया है जो संविधान, लोकतंत्र, आरक्षण, स्वतंत्रता, समता‑समानता, न्याय, गरिमा, देश की एकता‑अखंडता, सद्भाव‑सौहार्द‑बंधुत्व, महिलाओं के मान‑सम्मान, युवाओं, किसानों, मजदूरों, शोषित, वंचित, गरीब—कुल मिलाकर पीड़ित‑पीडीए के वर्तमान और भविष्य के हक व अधिकारों के घोर विरोधी हैं. भाजपाई और उनके मुखबिर संगी‑साथी आज़ादी से पहले भी देश के विरोधी थे और आज़ादी के बाद भी हैं. अब देशवासियों को यह समझना होगा कि देश की एकता और व्यवस्था को कमजोर करने वाले ये लोग किसके एजेंट हैं? स्वदेशी की बात कर विदेशों से पैसा लेने वाले ये लोग कौन हैं? ये अनरजिस्टर्ड क्यों हैं और अंडरग्राउंड क्यों रहते हैं? कोविड के नाम पर जनता से लिए गए चंदे का हिसाब क्यों नहीं देते? भ्रष्टाचार बढ़ाकर देश को बर्बाद क्यों कर रहे हैं? योजना आयोग को खत्म कर देश के विकास की नींव क्यों कमजोर की गई? शिक्षा पर कब्जा कर देश की मानसिक शक्ति को खोखला क्यों किया जा रहा है? सरकारी स्कूलों को बंद कर गरीबों के बच्चों को अनपढ़ क्यों रखा जा रहा है? नोटबंदी से छोटे कारोबार को खत्म क्यों किया गया? जीएसटी को उलझाकर अर्थव्यवस्था को कमजोर क्यों किया गया? देश का पैसा बाहर क्यों भेजा जा रहा है? विश्वगुरु बनने का दावा करने वाले देश के भगोड़ों को वापस क्यों नहीं ला रहे? सांप्रदायिक जहर फैलाकर देश की एकता को क्यों तोड़ा जा रहा है? राजनीतिक दलों को तोड़कर लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश क्यों हो रही है? अब वह निर्णायक समय आ गया है जब हम सबको मिलकर इन देश‑विरोधी नकारात्मक ताकतों को हमेशा के लिए हराना होगा, देश को बचाना होगा और देश की नई आज़ादी के लिए तिरंगा उठाना होगा.

समाजवादी पार्टी वर्तमान में इंडिया अलायंस का हिस्सा है. उत्तर प्रदेश में सपा का गठबंधन कांग्रेस के साथ है, जबकि टीएमसी के साथ उसके संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं. हालांकि, कांग्रेस और टीएमसी के बीच तीखा राजनीतिक टकराव रहा है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या बंगाल चुनाव के बाद इंडिया अलायंस के भीतर सपा‑कांग्रेस गठबंधन में दरार पड़ सकती है.

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर यूपी में शानदार प्रदर्शन किया था और बीजेपी को महज 33 सीटों पर रोक दिया था. सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी. हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग पर अंदरखाने मतभेद बताए जा रहे हैं.

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