जम्मू-कश्मीर में 2G मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल, जारी रहेगी सोशल साइट्स पर पाबंदी

पांच महीने से ज्यादा समय तक तक बंद रहने के बाद शुक्रवार देर रात से कश्मीर घाटी में पोस्टपेड के साथ ही प्रीपेड फोन पर 2G मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल हो गई हैं.

खास बातें

  • जम्मू-कश्मीर में 2G इंटरनेट सेवाएं बहाल
  • 301 वेबसाइट्स पर रोक नहीं
  • सोशल साइट्स पर जारी रहेगी पाबंदी
श्रीनगर:

पांच महीने से ज्यादा समय तक तक बंद रहने के बाद शुक्रवार देर रात से कश्मीर घाटी में पोस्टपेड के साथ ही प्रीपेड फोन पर 2G मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल हो गई हैं. इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है. हालांकि, जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा मंजूर 301 वेबसाइट्स तक ही लोगों की पहुंच हो सकेगी. जम्मू कश्मीर प्रशासन के गृह विभाग की एक अधिसूचना के मुताबिक मोबाइल फोन पर 2G स्पीड के साथ इंटरनेट सुविधा 25 जनवरी से शुरू हो गई है. सोशल मीडिया साइट्स तक घाटी के लोगों की पहुंच नहीं होगी और तय वेबसाइट्स तक ही उनकी पहुंच हो सकेगी.

यह सुविधा पोस्टपेड और प्रीपेड सिम कार्ड पर उपलब्ध होगी. जिन साइट्स को मंजूरी दी गई है, उनमें सर्च इंजन और बैंकिंग, शिक्षा, समाचार, यात्रा, सुविधाएं और रोजगार से संबंधित हैं. इससे पहले घाटी में प्रीपेड मोबाइल सेवा बहाल करने और जम्मू खंड में 2G मोबाइल डेटा सेवा शुरू करने का फैसला किया गया था. जम्मू के दस जिलों और कश्मीर के दो जिलों (कुपवाड़ा और बांदीपोरा) में पहले से ही 2G इंटरनेट सेवा दी जा रही है. जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के साथ पांच अगस्त को घाटी में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं रोक दी गई थीं.

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बताते चलें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों और नेताओं की नजरबंदी को लेकर दी गई याचिका पर सुनवाई की थी. कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक हफ्ते में सभी पाबंदियों की समीक्षा का आदेश दिया था. अदालत ने कहा था कि कश्मीर ने बहुत हिंसा देखी है. इंटरनेट फ्रीडम ऑफ स्पीच के तहत आता है. यह आर्टिकल-19 के तहत आता है. इंटरनेट फ्रीडम ऑफ स्पीच का जरिया भी है. इसे बंद करना न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है. जम्मू-कश्मीर में सभी पाबंदियों पर एक हफ्ते के भीतर समीक्षा की जाए. फिलहाल के लिए जहां जरूरत हो वहां तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाएं शुरू की जाएं.

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गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र शासित राज्यों में बांट दिया गया था. जम्मू-कश्मीर में तब से इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. सिर्फ ब्रॉडबैंड से ही संपर्क कायम है. सरकार ने लैंडलाइन फोन और पोस्टपेड मोबाइल सेवा भी हाल में ही शुरू की है. विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर के हालातों को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हैं. पाकिस्तान भी इस मुद्दे को लेकर विदेशी मंच पर भारत को घेरने की कोशिश करता आ रहा है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के मुनीर अकरम ने घाटी के हालातों को लेकर भारत पर कई आरोप लगाए. जिसके बाद UN में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ झूठ फैलाना बंद कर देना चाहिए. वह भारत के खिलाफ झूठी कहानियां गढ़ता है. ऐसा कर वह अपनी परेशानी को छुपाने की कोशिश करता है. आज पाकिस्तान बुराई का प्रतीक बन चुका है. (इनपुट ANI से भी)

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