
नई दिल्ली:
2-जी स्पेक्ट्रम मामले में अभियोजन पक्ष के एक प्रमुख गवाह ने बुधवार को दिल्ली की एक अदालत से कहा कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने लाइसेंसों के वितरण के लिए नीति के बारे में ‘अपने स्तर पर’ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सूचित किया, लेकिन इससे जुड़े मुद्दे दूरसंचार विभाग की फाइलों से ‘होकर नहीं गुजरे’ थे।
अभियोजन पक्ष के गवाह दूरसंचार विभाग के पूर्व उपमहानिदेशक (एसेस सर्विसेज) एके श्रीवास्तव ने गवाही दी कि 7 जनवरी 2008 को राजा ने उनसे कहा कि प्रधानमंत्री को 26 दिसंबर 2007 को भेजा गया पत्र दूरसंचार नीति के तौर पर ‘स्वीकार्य’ किया जाए।
श्रीवास्तव ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी से कहा, ‘26 दिसंबर, 2007 को तत्कालीन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए राजा द्वारा अपने स्तर पर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया। इससे जुड़े मुद्दे पर दूरंसचार विभाग ने न तो इस पर गौर किया था और न ही फाइलों में इस बारे में कोई कार्रवाई की गई थी।’
अभियोजन पक्ष के गवाह दूरसंचार विभाग के पूर्व उपमहानिदेशक (एसेस सर्विसेज) एके श्रीवास्तव ने गवाही दी कि 7 जनवरी 2008 को राजा ने उनसे कहा कि प्रधानमंत्री को 26 दिसंबर 2007 को भेजा गया पत्र दूरसंचार नीति के तौर पर ‘स्वीकार्य’ किया जाए।
श्रीवास्तव ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी से कहा, ‘26 दिसंबर, 2007 को तत्कालीन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए राजा द्वारा अपने स्तर पर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया। इससे जुड़े मुद्दे पर दूरंसचार विभाग ने न तो इस पर गौर किया था और न ही फाइलों में इस बारे में कोई कार्रवाई की गई थी।’
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