2020 में फाइनेंस, बीमा-बैंकिंग में मिली ये सौगात, जनवरी 2021 से भी होंगे बदलाव

2020 Year Ender : एनईएफटी (NEFT) और आरटीजीएस (RTGS) की 24 घंटे सुविधा के साथ रुपे और यूपीआई (UPI) लेनदेन पर शुल्क हटा है. बंद बीमा पॉलिसी 3 साल में शुरू कराने और शादी-शिक्षा या बीमारी में धन निकासी कर सकते हैं. इनकम टैक्स की नई प्रणाली भी शुरू हुई है

2020 में फाइनेंस, बीमा-बैंकिंग में मिली ये सौगात, जनवरी 2021 से भी होंगे बदलाव

Year Ender 2020 Business : 2021 जनवरी से भी सरकार ग्राहकों को दे रही है कई सुविधाएं

नई दिल्ली:

उपभोक्ताओं को फाइनेंस (वित्त), बीमा, बैंकिंग क्षेत्र में 2020 (Year ender) कई बड़ी सौगात मिली हैं. इनमें एनईएफटी(NEFT) और आरटीजीएस (RTGS) की 24 घंटे सातों दिन सुविधा, रुपे (RUPAY) और यूपीआई (UPI) लेनदेन पर शुल्क हटाना शामिल है. बंद बीमा पॉलिसी शुरू कराने के लिए अब ज्यादा वक्त और शादी-शिक्षा या बीमारी के वक्त इससे धन निकालने की व्यवस्था भी शुरू हुई है. इनकम टैक्स की नई वैकल्पिक प्रणाली भी इसी साल शुरू हुई है, 2021 जनवरी से भी ऐसी ही कई सुविधाएं ग्राहकों को मिलने वाली हैं. आइए जानते हैं अहम बातें...

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NEFT से 24 घंटे लेनदेन की सुविधा
आरबीआई ने बैंकों से एनईएफटी पर शुल्क हटाने को कहा था जो जनवरी 2020 से लागू हो गया. इससे डिजिटल लेनदेन पिछले 12 माह में ही 3 गुना तक बढ़ा है. सरकार ने रुपे और यूपीआई पेमेंट पर भी लगने वाला एमडीआर शुल्क भी खत्म कर दिया है.

एटीएम लेनदेन में ओटीपी
एसबीआई ने एटीएम से निकासी में ओटीपी (OTP) की सुविधा लागू कर दी. इससे एटीएम (ATM) से लेनदेन में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी. कई अन्य बैंकों ने भी यह सुविधा शुरू की है.

ज्यादा सैलरी घर ले जाने का मौका
सरकार ने फरवरी 2020 से कर्मचारियों को EPF में अंशदान कम कर ज्यादा सैलरी घर लाने का विकल्प भी दिया है. अभी वेतन का 12 फीसदी ईपीएफ में जाता है. लेकिन कर्मचारी चाहे तो इसे कम करा सकता है, ताकि उसकी टेकहोम सैलरी (Take Home Salary) बढ़ जाए.

रिवाइवल पीरियड 2 से बढ़ाकर 3 साल 
सरकार ने फरवरी 2020 से यूलिप पॉलिसी (ULIP) का रिवाइवल पीरियड 2 से बढ़ाकर 3 साल कर दिया है. अगर प्रीमियम देना बंद कर दिया हो तो 3 साल में कभी भी दोबारा पॉलिसी शुरू कर सकते हैं. शादी, उच्च शिक्षा या बीमारी के कारण बीमा का 25 फीसदी धन भी पॉलिसी के 5 साल बाद निकाल सकते हैं. इस पर कोई शुल्क नहीं होगा. पॉलिसी सरेंडर करने पर भी पहले के मुकाबले ज्यादा धन मिलेगा.

आयकर की नई व्यवस्था
सरकार ने 1 अप्रैल 2020 से आयकर की नई व्यवस्था दी, जिसमें  करदाता के पास किसी कर छूट का दावा किए बिना पूरी आय के हिसाब से टैक्स देना होगा. इसमें टैक्स स्लैब कम की गई हैं.
म्यूचुअल फंड के लाभांश (Dividend) पर निवेशक को टैक्स देना होगा.

चैरिटेबल ट्रस्ट के कर नियमों में बदलाव
सरकार ने 1 जून 2020 से चैरिटेबल ट्र्स्ट (Charitable Trust) और ऐसी अन्य संस्थाओं के नए सिरे से पंजीकरण के साथ आयकर नियमों में बदलाव कर दिया. आयकर विभाग (Income Tax) यह जांचेगा कि कर छूट का दावा करने वाली ये संस्थाएं वास्तव में कोई धर्मार्थ कर भी रही हैं या नहीं.

SEBI ने ब्रोकरेज के नए नियम लागू किए 
सेबी ने एक सितंबर से ब्रोकरेज के नए नियम लागू कर दिए. उसने मार्जिन रूल पर सख्ती कर दी, ताकि शेयर बाजार में तेज गिरावट के दौरान ब्रोकर इसका फायदा न उठा पाएं. साथ ही आज खरीदे गए शेयरों को ठीक अगले दिन कुछ शर्तों के साथ बेचा जा सकेगा.

वाहन बीमा कई साल का नहीं कराना होगा
बीमा नियामक इरडा (IRDAI) ने अगस्त 2020 से नई कार का एकमुश्त 3 साल का और बाइक का 5 साल का बीमा (Vehicle Insurance) लेने का नियम वापस ले लिया. इससे बाइक या कार खरीदने में ग्राहकों पर बोझ कम हो गया.  एक अगस्त से ई कॉमर्स कंपनियों के लिए हर उत्पाद पर उसके निर्माण की जगह का उल्लेख करना अनिवार्य किया गया. 

डीएल-आरसी साथ लेकर चलना जरूरी नहीं
वाहन चालकों के लिए एक अक्टूबर 2020 से Driving License (DL)  या Registration Certificate (RC) के दस्तावेज साथ रखने का अनिवार्यता खत्म की गई. डिजीलॉकर (Digilocker) या एमपरिवर्तन (Mparivarthan) जैसे ऐप में सुरक्षित इनकी डिजिटल कॉपी को दिखाना ही पर्याप्त माना जाएगा. मिठाई विक्रेताओं के लिए भी बेस्ट बिफोर डेट लिखना अनिवार्य किया गया. 


आरटीजीएस (RTGS) भी 24 घंटे 
सरकार ने 14 दिसंबर 2020 से RTGS को सरकार ने 24 घंटे के लिए शुरू कर दिया है. इससे दो लाख रुपये से ज्यादा की रकम को ट्रांसफर किया जाता है. इससे कम रकम के लिए नेटबैंकिंग पर एनईएफटी से लेनदेन किया जा सकता है.

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चेक से धोखाधड़ी रोकने को नया सिस्टम
आरबीआई चेक से धोखाधड़ी रोकने के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम 1 जनवरी 2021 से शुरू कर रहा है. इसमें 50 हजार रुपये से ज्यादा मूल्य के चेक पर जारी करने वाले को एसएमएस, बैंक के एप या इंटरनेट बैंकिंग के जरिेये अहम अकाउंट नंबर जैसी तमाम जानकारी बैंक से वेरीफाई करानी पड़ेंगी.