
सुप्रीम कोर्ट चुनाव रद्द करने पर दे सकता है फैसला
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मतदाता को किसी भी उम्मीदवार की शैक्षिक योग्यता के बारे में जानने का बुनियादी अधिकार है और सही जानकारी न देने पर उम्मीदवार के चुनाव को निरस्त किया जा सकता है.
मणिपुर के कांग्रेस एमएलए एम विश्वनाथ के खिलाफ एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये बात कही. विश्वनाथ ने 2012 के विधानसभा चुनाव में अपनी शैक्षिक योग्यता में खुद को एमबीए बताया था जिसे गलत पाया गया. कोर्ट के सामने दलील में विधायक ने इस जानकारी को उसके चुनाव एजेंट और वकील द्वारा हुई 'लिपिकीय गलती' कहा और कोर्ट से दरख्वास्त की कि उसके चुनाव को रद्द न किया जाए, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना. कोर्ट ने ये भी पाया कि उम्मीदवार ने 2008 के चुनावों में भी गलत जानकारी दी थी.
जस्टिस एआर दवे और जस्टिस नागेश्वर राव की बेंच ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि कि वोट के अधिकार का कोई मतलब नहीं रह जाता अगर वोटर को उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी सही सही पता न चले जिसमें शैक्षिक योग्यता के बारे में दी गई जानकारी भी शामिल है.
मणिपुर के कांग्रेस एमएलए एम विश्वनाथ के खिलाफ एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये बात कही. विश्वनाथ ने 2012 के विधानसभा चुनाव में अपनी शैक्षिक योग्यता में खुद को एमबीए बताया था जिसे गलत पाया गया. कोर्ट के सामने दलील में विधायक ने इस जानकारी को उसके चुनाव एजेंट और वकील द्वारा हुई 'लिपिकीय गलती' कहा और कोर्ट से दरख्वास्त की कि उसके चुनाव को रद्द न किया जाए, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना. कोर्ट ने ये भी पाया कि उम्मीदवार ने 2008 के चुनावों में भी गलत जानकारी दी थी.
जस्टिस एआर दवे और जस्टिस नागेश्वर राव की बेंच ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि कि वोट के अधिकार का कोई मतलब नहीं रह जाता अगर वोटर को उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी सही सही पता न चले जिसमें शैक्षिक योग्यता के बारे में दी गई जानकारी भी शामिल है.
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