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This Article is From Feb 21, 2022

पंजाब में वोटिंग आंकड़े में 'बड़ा' बदलाव, AAP के जनाधार वाले इलाकों में वोटिंग प्रतिशत गिरा

अमृतसर वेस्‍ट में सबसे कम 55.40% वोटिंग हुई, वहीं मुक्‍तसर के गिदरवाहा में सर्वाधिक 84.93% वोटिंग दर्ज हुई.

पंजाब में वोटिंग आंकड़े में 'बड़ा' बदलाव, AAP के जनाधार वाले इलाकों में वोटिंग प्रतिशत गिरा
पंजाब में 20 फरवरी को एक ही चरण में वोट डाले गए
चंडीगढ़:

Punjab polls 2022: पंजाब विधानसभा चुनाव में इस बार वोटिंग के आंकड़े, चुनाव आयोग की ओर से कल शाम घोषित किए गए संभावित आंकड़ों से करीब  4.3% अधिक है. रविवार की वोटिंग का शुरुआती आंकड़ा कल शाम को 65.32% बताया गया था लेकिन आज इस आंकड़े को संशोधित कर 69.65% किया गया है. वर्ष 2007 के बाद से यह वोटिंग का सबसे कम प्रतिशत है. इसके साथ ही वोटिंग के संभावित (Tentative)और अंतिम आंकड़े  (Final voting figures)का अंतर भी काफी अधिक है. सामान्‍यत: वोटिंग के आंकड़ों में करीब एक फीसदी का ही  फर्क होता है.  

वोटिंग के आंकड़े यह भी बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी मजबूत आधार होने का दावा करती रही है, वहां वोटिंग का प्रतिशत कम रहा. जिन विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायक 'आप' के हैं, उन सभी सीटों के वोटिंग प्रतिशत में 2.3 से 9  प्रतिशत तक की कमी देखने में आई है. तलवंडी साबो, जहां से बलजिंदर कौर मौजूदा विधायक हैं, में वोटिंग का प्रतिशत 86 से गिरकर 83.70%  पर आ गया. कोटकापुर में यह 4 फीसदी कम हुआ. दिरबा,  जहां से हरपाल सिंह चीमा चुनाव लड़ मैदान में थे, में यह  4.4% कम हुआ, सुनाम में इसमें  5.4, बरनाला में  6.6, बुधलाडा में 6.2, मेहल  कलां में 9.4 और जोगरांव में 9.8% की कमी आई. पंजाब राज्‍य में वर्ष 2002 में 65.14% वोटिंग हुई थी लेकिन इसके बाद वोटिंग का ग्राफ लगातार बढ़ा था. 2007 में 75.42 %, 2012 में  78.3% और 2017 में 77.36% मतदान हुआ था. 

अमृतसर वेस्‍ट में सबसे कम 55.40% वोटिंग हुई, वहीं मुक्‍तसर के गिदरवाहा में सर्वाधिक 84.93% वोटिंग दर्ज हुई. आमतौर पर कम वोटिंग को बदलाव को लेकर उदासीनता (यथास्थिति बरकरार रखना) और अधिक मतदान को बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जाता है. पंजाब में दोनों ही तरह के ट्रेंड देखे गए हैं. वर्ष 2007 में  20 साल का दूसरा सबसे कम वोटिंग आंकड़ा (68.72%) दर्ज हुआ था लेकिन कांग्रेस सरकार को बेदखल करके अकाली-बीजेपी गठबंधन सत्‍ता पर काबिज हुआ था.  वर्ष 2017 में जब कांग्रेस ने अकाली-बीजेपी सरकार के 10 साल के शासन को खत्‍म किया था तब वोटिंग का फिगर 77.36% था जो कि  2012 से कम था जब अकाली-बीजेपी दूसरी बार सत्‍ता में आए थे. इस बार की बात करें तो सत्‍तारूढ़ कांग्रेस और इसे चुनौती दे रही आम आदमी पार्टी (AAP), दोनों अपने पक्ष में हवा होने का दावा कर रहे हैं. एक तरह से अंतिम वोटिंग आंकड़ा (final turnout figures)इस साल का ट्रेंड बन रहा है. गोवा में शुरुआती आंकड़ा 75.29  बताया गया था जो करीब चार फीसदी के फर्क के साथ आज बढ़कर 79.16% पर पहुंच गया.  उत्‍तराखंड में शुरुआती वोटिंग आंकड़ा 59.37% बताया गया था जो बाद में 64.29% कर दिया गया. 

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