
सलेम (तमिलनाडु):
चंदन तस्कर वीरप्पन की विधवा ने कहा है कि उसके पति के चार साथियों को मौत की सजा नहीं दी जाए, जिन्हें बारूदी सुरंग विस्फोट के एक मामले में यह सजा सुनाई गई।
मुथुलक्ष्मी ने कहा, तमिलनाडु पुलिस पहले ही धर्मपुरी में मेरे पति को मार चुकी है। अब उनके चार साथियों को फांसी पर लटकाने की तैयारी है। कृपया ऐसा मत कीजिए।
वह पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, तमिलनाडु के महासचिव बालामुरुगन के हवाले से आईं इन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहीं थीं कि वीरप्पन के चार साथियों की दया याचिका को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया है। वीरप्पन के बड़े भाई ज्ञानप्रकाश के साथ सिमोन, मीसाई मदैयन और पिलावेंद्रन को कर्नाटक के पालार में हुए विस्फोट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में मौत की सजा सुनाई थी। वीरप्पन के गिरोह द्वारा किए गए इस विस्फोट में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे।
मदैयन की 60-वर्षीय पत्नी थंगम्माल ने भी दया याचिका खारिज होने की खबर पर दुख जताया। उन्होंने कहा, मेरे बेटे मादेश को पुलिस ने मार डाला और मेरे पति बेलगाम की जेल में हैं। हम गरीबी में जी रहे हैं। थंगम्माल ने छह महीने पहले जेल में अपने पति से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि तब मदैयन ने बताया था कि उसे कुछ महीनों में छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा, लेकिन अचानक से मैं सुन रही हूं कि उन्हें फांसी दे दी जाएगी। यह खबर मेरे सिर पर हथौड़े की तरह पड़ी है।
हालांकि एसटीएफ के दल का नेतृत्व करने वाले पूर्व पुलिस अधीक्षक के. गोपालकृष्णन ने कहा, मुझे खुशी है कि न्याय में देरी होने के बाद अंतत: फैसला हुआ, क्योंकि विस्फोट में 22 निर्दोष पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवा दी थी और 11 लोग घायल हुए थे।
मुथुलक्ष्मी ने कहा, तमिलनाडु पुलिस पहले ही धर्मपुरी में मेरे पति को मार चुकी है। अब उनके चार साथियों को फांसी पर लटकाने की तैयारी है। कृपया ऐसा मत कीजिए।
वह पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, तमिलनाडु के महासचिव बालामुरुगन के हवाले से आईं इन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहीं थीं कि वीरप्पन के चार साथियों की दया याचिका को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया है। वीरप्पन के बड़े भाई ज्ञानप्रकाश के साथ सिमोन, मीसाई मदैयन और पिलावेंद्रन को कर्नाटक के पालार में हुए विस्फोट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में मौत की सजा सुनाई थी। वीरप्पन के गिरोह द्वारा किए गए इस विस्फोट में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे।
मदैयन की 60-वर्षीय पत्नी थंगम्माल ने भी दया याचिका खारिज होने की खबर पर दुख जताया। उन्होंने कहा, मेरे बेटे मादेश को पुलिस ने मार डाला और मेरे पति बेलगाम की जेल में हैं। हम गरीबी में जी रहे हैं। थंगम्माल ने छह महीने पहले जेल में अपने पति से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि तब मदैयन ने बताया था कि उसे कुछ महीनों में छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा, लेकिन अचानक से मैं सुन रही हूं कि उन्हें फांसी दे दी जाएगी। यह खबर मेरे सिर पर हथौड़े की तरह पड़ी है।
हालांकि एसटीएफ के दल का नेतृत्व करने वाले पूर्व पुलिस अधीक्षक के. गोपालकृष्णन ने कहा, मुझे खुशी है कि न्याय में देरी होने के बाद अंतत: फैसला हुआ, क्योंकि विस्फोट में 22 निर्दोष पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवा दी थी और 11 लोग घायल हुए थे।
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