
शरद पवार की फाइल तस्वीर
नागपुर:
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी प्रमुख और वरिष्ठ नेता शरद पवार के अपने राजनीतिक करियर के शिखर पर होने के समय देश का पहला मराठी प्रधानमंत्री नहीं बनने को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों ने हाल में 75 वर्ष के हुए पवार को गर्मजोशी से शुभकामनाएं दीं, जिनका पांच दशक लंबा राजनीतिक करियर है।
सदन के नेता फडणवीस ने प्रस्ताव पेश कर विधानसभा में पवार को शुभकामना दी, वहीं विधान परिषद में सदन के नेता और राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने प्रस्ताव पेश किया।
फडणवीस ने पवार की राजनीतिक कुशलता और प्रशासनिक क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पवार को उस समय पहला मराठी प्रधानमंत्री बनने का अवसर नहीं मिला, जब वह अपने राजनीतिक करियर के शिखर पर थे। वह पहले मराठी भाषी प्रधानमंत्री बन सकते थे। पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सदस्यों ने फडणवीस से सहमति जताई। कभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे पवार का प्रधानमंत्री न बन पाना अक्सर गर्मागर्म राजनीतिक बहस का सबब बनता है।
अपनी किताब 'लाइफ ऑन माई टर्म्स-फ्रॉम द ग्रासरूट्स एंड कोरिडोर ऑफ पावर' में शरद पवार ने इस बात का खुलासा किया है कि 1991 में वह कैसे प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे, जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके प्रधानमंत्री बनने का विरोध किया था, क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि 'आजाद जहन वाला कोई व्यक्ति' सत्ता के शीर्ष पर हो।
सदन के नेता फडणवीस ने प्रस्ताव पेश कर विधानसभा में पवार को शुभकामना दी, वहीं विधान परिषद में सदन के नेता और राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने प्रस्ताव पेश किया।
फडणवीस ने पवार की राजनीतिक कुशलता और प्रशासनिक क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पवार को उस समय पहला मराठी प्रधानमंत्री बनने का अवसर नहीं मिला, जब वह अपने राजनीतिक करियर के शिखर पर थे। वह पहले मराठी भाषी प्रधानमंत्री बन सकते थे। पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सदस्यों ने फडणवीस से सहमति जताई। कभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे पवार का प्रधानमंत्री न बन पाना अक्सर गर्मागर्म राजनीतिक बहस का सबब बनता है।
अपनी किताब 'लाइफ ऑन माई टर्म्स-फ्रॉम द ग्रासरूट्स एंड कोरिडोर ऑफ पावर' में शरद पवार ने इस बात का खुलासा किया है कि 1991 में वह कैसे प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे, जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके प्रधानमंत्री बनने का विरोध किया था, क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि 'आजाद जहन वाला कोई व्यक्ति' सत्ता के शीर्ष पर हो।
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