
नई दिल्ली:
दोषी सांसदों और विधायकों को बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा गलत बताए जाने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार में इस कदम के लिए जिम्मेदार लोगों को त्यागपत्र दे देना चाहिए।
जेटली ने कहा, मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि (कांग्रेस को) बहुत देर से इस बात का एहसास हुआ है कि बकवास क्या है और यदि कांग्रेस पार्टी वास्तव में इस पर विश्वास करती है कि यह (अध्यादेश) बकवास है तो वे लोग जिन्होंने एक महीने के भीतर दो बार देश के सामने इस बकवास को पेश किया है.. यह सुशासन का प्रश्न है.. क्या वे लोग (सत्ता में) बने रहेंगे या फिर वे हटेंगे?
जेटली कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा है कि अध्यादेश को ‘फाड़कर फेंक देना चाहिए।’ इस संदर्भ में नेहरू-गांधी परिवार पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि यदि वे लोग इस्तीफा नहीं देते हैं तो इसका तात्पर्य यही होगा कि यह सब दिखावा है और यह स्थापित करने का प्रयास है कि सरकार गलतियां करती है बाकी दुनिया गलती करती है, लेकिन कांग्रेस का प्रथम परिवार गलतियां नहीं करता।
राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश का विरोध किए जाने को जेटली ने ‘गलती सुधारने का एक हताशा भरा कदम ’बताया है। जेटली ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में अध्यादेश के खिलाफ राष्ट्रव्यापी रोष है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दोषी करार दिए गए नेताओं को संसदीय प्रणाली का हिस्सा बनाए रखने के विषय को संप्रग मंत्रिमंडल दो बार मंजूरी दे चुका है.. पहली बार बतौर विधेयक और दूसरी बार बतौर अध्यादेश। उन्होंने कहा कि दोनों ही मौकों पर कांग्रेस पार्टी ने इसका समर्थन किया है।
जेटली ने कहा, उन्होंने इसका विरोध नहीं किया। इसलिए ऐसा नहीं है कि आज से पहले कांग्रेस इस संबंध में अनजान थी। और सच तो यह है कि इसे (विधेयक) पारित कराने के लिए सत्र की अवधि एक दिन के लिए बढ़ाई गई थी। उन्होंने कहा कि सिर्फ विपक्षी दलों और संसद के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका और उसे स्थायी समिति को भेजा गया।
जेटली ने कहा, मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि (कांग्रेस को) बहुत देर से इस बात का एहसास हुआ है कि बकवास क्या है और यदि कांग्रेस पार्टी वास्तव में इस पर विश्वास करती है कि यह (अध्यादेश) बकवास है तो वे लोग जिन्होंने एक महीने के भीतर दो बार देश के सामने इस बकवास को पेश किया है.. यह सुशासन का प्रश्न है.. क्या वे लोग (सत्ता में) बने रहेंगे या फिर वे हटेंगे?
जेटली कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा है कि अध्यादेश को ‘फाड़कर फेंक देना चाहिए।’ इस संदर्भ में नेहरू-गांधी परिवार पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि यदि वे लोग इस्तीफा नहीं देते हैं तो इसका तात्पर्य यही होगा कि यह सब दिखावा है और यह स्थापित करने का प्रयास है कि सरकार गलतियां करती है बाकी दुनिया गलती करती है, लेकिन कांग्रेस का प्रथम परिवार गलतियां नहीं करता।
राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश का विरोध किए जाने को जेटली ने ‘गलती सुधारने का एक हताशा भरा कदम ’बताया है। जेटली ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में अध्यादेश के खिलाफ राष्ट्रव्यापी रोष है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दोषी करार दिए गए नेताओं को संसदीय प्रणाली का हिस्सा बनाए रखने के विषय को संप्रग मंत्रिमंडल दो बार मंजूरी दे चुका है.. पहली बार बतौर विधेयक और दूसरी बार बतौर अध्यादेश। उन्होंने कहा कि दोनों ही मौकों पर कांग्रेस पार्टी ने इसका समर्थन किया है।
जेटली ने कहा, उन्होंने इसका विरोध नहीं किया। इसलिए ऐसा नहीं है कि आज से पहले कांग्रेस इस संबंध में अनजान थी। और सच तो यह है कि इसे (विधेयक) पारित कराने के लिए सत्र की अवधि एक दिन के लिए बढ़ाई गई थी। उन्होंने कहा कि सिर्फ विपक्षी दलों और संसद के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका और उसे स्थायी समिति को भेजा गया।
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