नई दिल्ली:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आपत्तिजनक लेख लिखने के मामले में जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी को सोमवार को अग्रिम जमानत दे दी। न्यायालय ने उनकी ओर से दायर शपथ पत्र के आधार पर उन्हें अग्रिम जमानत दे दी, जिसमें उन्होंने भविष्य में ऐसा लेख नहीं लिखने की बात कही।
स्वामी को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति एमएल मेहता ने कहा, "मैं इसकी प्रशंसा करता हूं कि आपने यह शपथ-पत्र देकर जिम्मेदारी निभाई। हालांकि किसी पुस्तक के आधार पर लेख लिखना किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल कुछ तर्कसंगत प्रतिबंधों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।"
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने स्वामी से 25 हजार का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत देने को कहा।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में स्वामी के खिलाफ तीन अक्टूबर, 2011 को मामला दर्ज किया था। एक समाचार पत्र में पिछले साल 17 जुलाई को प्रकाशित लेख में उन्होंने अल्पसंख्यकों के मताधिकारों को लेकर टिप्पणी की थी।
स्वामी को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति एमएल मेहता ने कहा, "मैं इसकी प्रशंसा करता हूं कि आपने यह शपथ-पत्र देकर जिम्मेदारी निभाई। हालांकि किसी पुस्तक के आधार पर लेख लिखना किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल कुछ तर्कसंगत प्रतिबंधों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।"
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने स्वामी से 25 हजार का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत देने को कहा।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में स्वामी के खिलाफ तीन अक्टूबर, 2011 को मामला दर्ज किया था। एक समाचार पत्र में पिछले साल 17 जुलाई को प्रकाशित लेख में उन्होंने अल्पसंख्यकों के मताधिकारों को लेकर टिप्पणी की थी।
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