नई दिल्ली:
तृणमूल कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लिए जाने से उत्पन्न स्थिति के बीच यूपीए को बड़ी राहत प्रदान करते हुए समाजवादी पार्टी ने कहा कि वह सरकार को अपना समर्थन जारी रखेगी, क्योंकि वह सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में नहीं आने देना चाहती।
समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने संवाददाताओं से कहा, हमारा समर्थन स्पष्ट है। हम सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में नहीं आने देंगे। इसीलिए मैं समर्थन कर रहा हूं। मैं यूपीए में नहीं हूं, लेकिन हम समर्थन कर रहे हैं, ताकि सांप्रदायिक शक्तियां आगे नहीं बढ़ सकें। मुलायम का बयान यूपीए के लिए बड़ी राहत की बात है, जिसकी लोकसभा में संख्या तृणमूल के समर्थन वापस लेने के बाद 273 से घटकर 254 रह गई है।
बाहर से समर्थन कर रही सपा (22) और बसपा (21) के कारण गठबंधन के पास 545-सदस्यीय लोकसभा में 300 से अधिक सांसदों का समर्थन होगा। सरकार के पास साधारण बहुमत के लिए कम से कम 273 सांसदों का समर्थन होना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या सपा यूपीए से समर्थन वापस लेगी, मुलायम ने कहा, हम समर्थन वापस क्यों लेंगे? हमें सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता से दूर रखना है, लेकिन हम यूपीए में शामिल नहीं हैं।
उनकी टिप्पणी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और डीजल के दामों में वृद्धि को लेकर सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान वाम दलों, जनता दल (एस), बीजद और तेदेपा नेताओं के साथ मंच साझा करने के एक दिन बाद आई है। मुलायम ने हालांकि, नजदीक ही स्थित एक प्रदर्शन स्थल पर बीजेपी नेताओं के साथ मंच साझा करने से इनकार कर दिया था, जहां वाम नेता सीताराम येचुरी और एबी वर्धन भी मौजूद थे।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह मध्यावधि चुनावों के पक्ष में हैं, मुलायम ने उल्टा सवाल दागा, मध्यावधि चुनावों का प्रश्न ही कहां उठता है? इस बारे में कांग्रेस से पूछिए, वह क्या चाहती है, वह यह (मध्यवाधि चुनाव) चाहती है या सरकार चलाना चाहती है। इस बात पर कि ऐसा कहा जाता है कि यदि मध्यवाधि चुनाव हुए, तो वह जिम्मेदार होंगे, मुलायम ने कहा, यह हम पर निर्भर नहीं है। यह कांग्रेस की जिम्मेदारी है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार अल्पमत में है, उन्होंने कहा कि यह लोकसभा में स्पष्ट होगा। उन्होंने कहा, हम एफडीआई और डीजल के दामों में वृद्धि का विरोध जारी रखेंगे। हम इसका लोकसभा में भी विरोध करेंगे, क्योंकि इससे देश में पांच करोड़ लोग प्रभावित होंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी केंद्र सरकार में शामिल होगी, मुलायम ने कहा कि यह बेकार की बात है।
इस सवाल पर कि समर्थन के मुद्दे पर उनकी पार्टी अंतिम फैसला कब करेगी, मुलायम ने कहा कि उनकी बैठकें होती रहती हैं और उनमें राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती है। हम फैसले लेते हैं और इसका पालन करते हैं। हम पहले से ही यूपीए का समर्थन कर रहे हैं।
यह कहे जाने पर कि एक वरिष्ठ सीपीएम नेता ने सलाह दी है कि उन्हें तीसरे मोर्चे का नेतृत्व करना चाहिए, मुलायम ने कहा कि इस तरह का मोर्चा अगले चुनावों के बाद ही बनेगा। इस सवाल पर कि क्या वह कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं, सपा प्रमुख ने कहा, हम सभी दलों से बात कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या यूपीए संकट में है या नहीं, उन्होंने कहा, कृपया यह सवाल प्रधानमंत्री से पूछिए। यह मेरा काम नहीं है।
(इनपुट भाषा से भी)
समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने संवाददाताओं से कहा, हमारा समर्थन स्पष्ट है। हम सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में नहीं आने देंगे। इसीलिए मैं समर्थन कर रहा हूं। मैं यूपीए में नहीं हूं, लेकिन हम समर्थन कर रहे हैं, ताकि सांप्रदायिक शक्तियां आगे नहीं बढ़ सकें। मुलायम का बयान यूपीए के लिए बड़ी राहत की बात है, जिसकी लोकसभा में संख्या तृणमूल के समर्थन वापस लेने के बाद 273 से घटकर 254 रह गई है।
बाहर से समर्थन कर रही सपा (22) और बसपा (21) के कारण गठबंधन के पास 545-सदस्यीय लोकसभा में 300 से अधिक सांसदों का समर्थन होगा। सरकार के पास साधारण बहुमत के लिए कम से कम 273 सांसदों का समर्थन होना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या सपा यूपीए से समर्थन वापस लेगी, मुलायम ने कहा, हम समर्थन वापस क्यों लेंगे? हमें सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता से दूर रखना है, लेकिन हम यूपीए में शामिल नहीं हैं।
उनकी टिप्पणी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और डीजल के दामों में वृद्धि को लेकर सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान वाम दलों, जनता दल (एस), बीजद और तेदेपा नेताओं के साथ मंच साझा करने के एक दिन बाद आई है। मुलायम ने हालांकि, नजदीक ही स्थित एक प्रदर्शन स्थल पर बीजेपी नेताओं के साथ मंच साझा करने से इनकार कर दिया था, जहां वाम नेता सीताराम येचुरी और एबी वर्धन भी मौजूद थे।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह मध्यावधि चुनावों के पक्ष में हैं, मुलायम ने उल्टा सवाल दागा, मध्यावधि चुनावों का प्रश्न ही कहां उठता है? इस बारे में कांग्रेस से पूछिए, वह क्या चाहती है, वह यह (मध्यवाधि चुनाव) चाहती है या सरकार चलाना चाहती है। इस बात पर कि ऐसा कहा जाता है कि यदि मध्यवाधि चुनाव हुए, तो वह जिम्मेदार होंगे, मुलायम ने कहा, यह हम पर निर्भर नहीं है। यह कांग्रेस की जिम्मेदारी है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार अल्पमत में है, उन्होंने कहा कि यह लोकसभा में स्पष्ट होगा। उन्होंने कहा, हम एफडीआई और डीजल के दामों में वृद्धि का विरोध जारी रखेंगे। हम इसका लोकसभा में भी विरोध करेंगे, क्योंकि इससे देश में पांच करोड़ लोग प्रभावित होंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी केंद्र सरकार में शामिल होगी, मुलायम ने कहा कि यह बेकार की बात है।
इस सवाल पर कि समर्थन के मुद्दे पर उनकी पार्टी अंतिम फैसला कब करेगी, मुलायम ने कहा कि उनकी बैठकें होती रहती हैं और उनमें राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती है। हम फैसले लेते हैं और इसका पालन करते हैं। हम पहले से ही यूपीए का समर्थन कर रहे हैं।
यह कहे जाने पर कि एक वरिष्ठ सीपीएम नेता ने सलाह दी है कि उन्हें तीसरे मोर्चे का नेतृत्व करना चाहिए, मुलायम ने कहा कि इस तरह का मोर्चा अगले चुनावों के बाद ही बनेगा। इस सवाल पर कि क्या वह कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं, सपा प्रमुख ने कहा, हम सभी दलों से बात कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या यूपीए संकट में है या नहीं, उन्होंने कहा, कृपया यह सवाल प्रधानमंत्री से पूछिए। यह मेरा काम नहीं है।
(इनपुट भाषा से भी)
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