
दिल्ली समेत उत्तर भारत का बहुत बड़ा इलाक़ा सिज्मिक ज़ोन 4 और 5 में आता है। यानी भूकंप के सबसे ज़्यादा खतरे वाले इलाकों में। ऐसे में थोड़ी सी तैयारी मुसीबत के वक्त बहुत मददगार साबित हो सकती है। जानते हैं कि ये तैयारी कैसी होनी चाहिए।
भूकंप के बाद चारों तरफ तबाही और अफरा-तफरी होती है। बिजली, गैस, टेलीफोन सेवा बंद हो जाती है। मेडिकल सेवा से लेकर खाने-पीने की किल्लत से सभी को जूझना पड़ता है। मदद पहुंचाने वाली एजेसिंया भी कई बार इसका शिकार होती हैं। ऐसे में आपकी तैयारी ऐसी होनी चाहिए कि तीन दिन से लेकर एक हफ्ते तक अपनी मदद ख़ुद कर पाएं।
भूकंप के बाद चारों तरफ तबाही और अफरा-तफरी होती है। बिजली, गैस, टेलीफोन सेवा बंद हो जाती है। मेडिकल सेवा से लेकर खाने-पीने की किल्लत से सभी को जूझना पड़ता है। मदद पहुंचाने वाली एजेसिंया भी कई बार इसका शिकार होती हैं। ऐसे में आपकी तैयारी ऐसी होनी चाहिए कि तीन दिन से लेकर एक हफ्ते तक अपनी मदद ख़ुद कर पाएं।
- एक भूकंप किट बनाएं और इसमें पीने के पानी की पर्याप्त मात्रा रखें।
- फर्स्ट एड का बक्सा और दवाएं तैयार रखें।
- हर तरह की आग बुझाने वाला अग्निशामक भी आपके पास हो।
- भूकंप किट में टॉर्च जरूर रखें।
- छोटा रेडियो हमेशा ऐसी स्थिति में मददगार होता है, इसी से आप सरकारी ऐलानों को सुन सकते हैं।
- अलग से बैटरी भी अपने भूकंप किट में रख लें।
- कंबल, पहनने के कपड़े और जूते रखना ना भूलें।
- आपके पास पर्याप्त मात्रा में नकद पैसा होना चाहिए, क्योंकि एटीएम काम करना बंद कर सकते हैं
- बच्चों का खाना भी अपनी भूकंप किट में रखें।
- छोटा स्टोव भी रखें, ताकि मुसीबत के समय खाना पकाने के काम आ सके।
- इसके अलावा परिवार के लोगों को आपस में बात करके कुछ ऐसे तरीके तय कर लेने चाहिए जिससे बिछड़ने की हालत में दोबारा मिल सकें।
- आप किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार को प्वाइंट पर्सन बना सकते हैं जो प्राकृतिक आपदा वाली जगह से दूर हो।
- वाटर हीटर और बिजली के बड़े उपकरण, भारी फर्नीचर को इस तरह रखें कि वो गिरें नहीं।
- किसी तरह के ख़तरनाक रसायन, गैस आदि घर में जमा न करें।
- टूटने-फूटने वाले सामान को मज़बूत केबिन में रखें
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