
कर्नाटक में कोरोनावायरस की वजह से दो मौतें हो चुकी हैं. राज्य में कोरोना से मौत के दूसरे मामले में 70 साल की एक महिला जो हाल ही में सऊदी अरब से लौटी थी ने इस बीमारी के चलते दम तोड़ दिया. अब राज्य में कोरोना के मरीज़ों की संख्या 55 तक पहुंच गई है लेकिन इसके बावजूद लॉकडाउन की परवाह न तो लोगों को है और न ही नेताओं को. एक ओर राज्य के मेडिकल शिक्षा मन्त्री के. सुधाकर ने कोविड-19 पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और वहां भी कॉन्फ्रेंस हॉल भरा हुआ था. वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार भी इस मामले में पीछे नहीं हैं. लेकिन इस सबके बावजूद नेता दूसरों को सोशल डिस्टेंसिंग यानी सुरक्षित दूरी बनाए रखने की शिक्षा दे रहे हैं.
के सुधाकर ने कहा , 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 हफ्ते के लिए लॉकडाउन की बात कही है. इससे सोशल डिस्टेंसिंग होगी और यह इस संक्रमण को को कम करने में काफी मददगार साबित होगा.' मन्त्री और नेता बेफिक्र हैं तो लोगों को भी सोशल डिस्टेनसिंग की परवाह नहीं है. राज्य के अलग अलग शहरों में दुकानों पर भीड़ जुटी हुई है. पुलिस स्टेशन के बाहर कर्फ्यू पास लेने के लिए भी भीड़ जमा हो रही है.
सरकार के और हाईकोर्ट के कर्मचारियों को पहचान पत्र के साथ छूट है लेकिन ज़रूरी समान बनाने बेचने वालों के साथ साथ कूरियर पहुंचाने वालों के लिए पास ज़रूरी है. पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने बताया, 'हम लोगों का भरोसा कर उनको ईमानदार मानते हुए पास दे रहे हैं लेकिन अगर किसी ने इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश की तो सख्त क़ानूनी करवाई की जाएगी.'
कोशिश कम से कम 12 घंटे जरूरी सामानों के दुकानों को खुले रखने की है ताकि दुकानों पर भीड़भाड़ ना हो. लेकिन इसके बावजूद पुलिस के लिए लोगों को एक जगह पर इकट्ठा होने से रोकना काफी मुश्किल हो रहा है और लोग भी समझने को तैयार नहीं है.
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