
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रिवेंटिव डिटेक्शन कानून के तहत पुलिस मामूली चोरों को गिरफ्तार नहीं कर सकती.
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि प्रिवेंटिव डिटेक्शन कानून के तहत पुलिस मामूली चोरों को प्रिवेंटिव गिरफ्तार नहीं कर सकती. यह गिरफ्तारी रेयरेस्ट आफ रेयर केस में होनी चाहिए. इस टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को एक साल से प्रिवेंटिव गिरफ्तार किए गए साड़ी चोर को छोड़ने का फैसला करने को मजबूर कर दिया. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि प्रिवेंटिव डिटेंशन का कदम मामूली चोरों के लिए नहीं बल्कि गुंडों और शराब बेचने वालों के लिए है. इसे रेयरेस्ट आफ द रेयर केसों में करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुनाता है तो यह राज्य के लिए मुश्किल होगा. बेहतर होगा कि तेलंगाना खुद इस पर फैसला करे. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि साड़ी चोर ने व्यापारियों को परेशान कर दिया था. पुलिस के पास उसके सीसीटीवी फुटेज भी हैं. लेकिन प्रधान न्यायाधीश मे कहा कि पुलिस के पास उसे सजा देने के कई तरीके हैं. उसके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर सजा दिलाई जाए. जमानत का विरोध किया जाए. इसके बाद तेलंगाना सरकार ने कहा कि वह एलिहा को छोड़ने के आदेश जारी कर देगी. मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट हैदराबाद में साड़ी चुराने वाले को गिरफ्तार करने के मामले की सुनवाई कर रहा है. एलिहा पर आरोप है कि उसने हैदराबाद में पांच साड़ियां चुराई हैं. तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने व्यापारियों की शिकायत पर उसे प्रिवेंटिव अरेस्ट कर लिया. साल भर से वह जेल में है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस पर बड़े सवाल उठाए हैं.
पिछली सुनवाई में भी पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची एलिहा की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस खेहर ने कहा था कि यह पुलिस है, कुछ साड़ियां चोरी करने वाला जेल में है. हालांकि उन्होंने विजय माल्या का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि दूसरी तरफ एक शख्स है जो करोड़ों रुपये लेकर भी मजे कर रहा है.
हालांकि सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार ने इस मामले में प्रिवेंटिव गिरफ्तारी को सही ठहराया था. सरकार की ओर से दलील दी गई कि आरोपी साड़ी चोरी करने वाले गैंग से है. इस गैंग ने साड़ी चोरियों की वारदातों को लगातार अंजाम दिया है जिसकी वजह से व्यापारी बहुत परेशान हैं.
राज्य सरकार ने दलील दी कि उसके खिलाफ लगातार व्यापारियों की शिकायतें आ रही थी. इसी कारण पुलिस ने उसकी प्रिवेंटिव गिरफ्तारी की ताकि भविष्य में इन वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके. बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुनाता है तो यह राज्य के लिए मुश्किल होगा. बेहतर होगा कि तेलंगाना खुद इस पर फैसला करे. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि साड़ी चोर ने व्यापारियों को परेशान कर दिया था. पुलिस के पास उसके सीसीटीवी फुटेज भी हैं. लेकिन प्रधान न्यायाधीश मे कहा कि पुलिस के पास उसे सजा देने के कई तरीके हैं. उसके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर सजा दिलाई जाए. जमानत का विरोध किया जाए. इसके बाद तेलंगाना सरकार ने कहा कि वह एलिहा को छोड़ने के आदेश जारी कर देगी. मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट हैदराबाद में साड़ी चुराने वाले को गिरफ्तार करने के मामले की सुनवाई कर रहा है. एलिहा पर आरोप है कि उसने हैदराबाद में पांच साड़ियां चुराई हैं. तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने व्यापारियों की शिकायत पर उसे प्रिवेंटिव अरेस्ट कर लिया. साल भर से वह जेल में है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस पर बड़े सवाल उठाए हैं.
पिछली सुनवाई में भी पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची एलिहा की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस खेहर ने कहा था कि यह पुलिस है, कुछ साड़ियां चोरी करने वाला जेल में है. हालांकि उन्होंने विजय माल्या का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि दूसरी तरफ एक शख्स है जो करोड़ों रुपये लेकर भी मजे कर रहा है.
हालांकि सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार ने इस मामले में प्रिवेंटिव गिरफ्तारी को सही ठहराया था. सरकार की ओर से दलील दी गई कि आरोपी साड़ी चोरी करने वाले गैंग से है. इस गैंग ने साड़ी चोरियों की वारदातों को लगातार अंजाम दिया है जिसकी वजह से व्यापारी बहुत परेशान हैं.
राज्य सरकार ने दलील दी कि उसके खिलाफ लगातार व्यापारियों की शिकायतें आ रही थी. इसी कारण पुलिस ने उसकी प्रिवेंटिव गिरफ्तारी की ताकि भविष्य में इन वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके. बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है.
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