
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादास्पद जमीन पर बने राम लला मंदिर के पुराने तिरपाल, रस्सी और अन्य पुरानी चीजों को बदलने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि फैजाबाद के कमिश्नर जिस तरह के तिरपाल, रस्सी, चटाई और पॉलीथिन की चादरें व बांस आदि लगे हैं, उन्हीं आकार की चीजों से उसे बदलें। साथ ही कोर्ट ने कहा कि दो ऑब्जर्वर की देखरेख में यह तिरपाल आदि बदलने का काम पूरा किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह तमाम पार्टियों को इस मामले से संबंधित रेकॉर्ड की सीडी उपलब्ध कराएं। अदालत ने इस मामले से संबंधित पार्टियों को रेकॉर्ड के इन्सपेक्शन की अनुमति देने से मना कर दिया। अदालत ने आउट ऑफ टर्न इस मामले की सुनवाई से इनकार किया और कहा कि तमाम जरूरी प्रोसेस पूरी होने के बाद ही अपील पर सुनवाई होनी चाहिए। इससे पहले आब्जर्वर ने कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी कि राम लला मंदिर में पुराने व फट चुके तिरपाल आदि को बदला जाना चाहिए और साथ ही दलील दी कि पहले भी कोर्ट ने इसके लिए आदेश दिए थे। इसके बाद कोर्ट ने उक्त आदेश पारित किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट कोर्ट में यह कहा गया कि इस मामले में दो ऑब्जर्वर में से एक का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में उनकी जगह नए की नियुक्ति होनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से 6 हफ्ते में फैसला लेने के लिए कहा है।
ऐसे तो केस में लग जाएंगे दस साल
अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस में जितने कागजात हैं उससे लगता है कि मामले का फैसला आने में दस साल लग सकते हैं। दोनों पक्षों के वकील जल्द की रजिस्ट्री में जाकर इस केस का सारा डिजिटलाइज रिकार्ड हासिल करें और केस की तैयारी करें। बेंच की अगुवाई कर रहे जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि हजारों कागजात हैं। इनमें अरबी, फारसी और संस्कृत के कागजात भी शामिल हैं। इनका अनुवाद भी किया जाना है। इसे देखकर लगता है कि केस की सुनवाई में दस साल तक लग जाएंगे।
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाइकोर्ट का पूरा आदेश और कागजात सुप्रीम कोर्ट में आते-आते दो साल लगे। अब दोनों पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से लेकर हार्ड कापी से मिलान कर अपील के लिए तैयारी करनी है और इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष जल्द अपनी तैयारी करें जिससे वक्त पर यह केस सुनवाई के लिए तैयार हो। इससे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश राजीव धवन ने कहा था कि केस की सुनवाई बारी से पहले होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह तमाम पार्टियों को इस मामले से संबंधित रेकॉर्ड की सीडी उपलब्ध कराएं। अदालत ने इस मामले से संबंधित पार्टियों को रेकॉर्ड के इन्सपेक्शन की अनुमति देने से मना कर दिया। अदालत ने आउट ऑफ टर्न इस मामले की सुनवाई से इनकार किया और कहा कि तमाम जरूरी प्रोसेस पूरी होने के बाद ही अपील पर सुनवाई होनी चाहिए। इससे पहले आब्जर्वर ने कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी कि राम लला मंदिर में पुराने व फट चुके तिरपाल आदि को बदला जाना चाहिए और साथ ही दलील दी कि पहले भी कोर्ट ने इसके लिए आदेश दिए थे। इसके बाद कोर्ट ने उक्त आदेश पारित किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट कोर्ट में यह कहा गया कि इस मामले में दो ऑब्जर्वर में से एक का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में उनकी जगह नए की नियुक्ति होनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से 6 हफ्ते में फैसला लेने के लिए कहा है।
ऐसे तो केस में लग जाएंगे दस साल
अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस में जितने कागजात हैं उससे लगता है कि मामले का फैसला आने में दस साल लग सकते हैं। दोनों पक्षों के वकील जल्द की रजिस्ट्री में जाकर इस केस का सारा डिजिटलाइज रिकार्ड हासिल करें और केस की तैयारी करें। बेंच की अगुवाई कर रहे जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि हजारों कागजात हैं। इनमें अरबी, फारसी और संस्कृत के कागजात भी शामिल हैं। इनका अनुवाद भी किया जाना है। इसे देखकर लगता है कि केस की सुनवाई में दस साल तक लग जाएंगे।
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाइकोर्ट का पूरा आदेश और कागजात सुप्रीम कोर्ट में आते-आते दो साल लगे। अब दोनों पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से लेकर हार्ड कापी से मिलान कर अपील के लिए तैयारी करनी है और इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष जल्द अपनी तैयारी करें जिससे वक्त पर यह केस सुनवाई के लिए तैयार हो। इससे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश राजीव धवन ने कहा था कि केस की सुनवाई बारी से पहले होनी चाहिए।
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