
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए केंद्र तथा दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर बुधवार को संतोष जताते हुए कहा कि अदालत में ऐसा कोई भी मामला नहीं आया है, जिसमें प्रशासन की नाकामी की बात कही गई हो।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी तथा न्यायाधीश आर.एस.एंडलॉ की खंडपीठ ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने को लेकर एक जनहित याचिका पर आदेश पारित करते हुए कहा, "इस मामले में दिल्ली तथा केंद्र सरकार द्वारा पहले जो कदम उठाए गए हैं और वर्तमान में जो कदम उठाए जा रहे हैं, उससे हम संतुष्ट हैं।"
स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के मुद्दे पर न्यायालय ने कहा, "जहां तक जन जागरूकता को लेकर सुझाव की बात है, तो दिल्ली में रहने के हमारे अपने अनुभव से हमने इस बात को महसूस किया है कि इसमें कोई कमी नहीं है।"
उसने कहा, "इस विषय पर समाज में विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई है। पहले ही इस बीमारी को लेकर काफी भय फैल चुका है।"
जनहित याचिका में मांग की गई थी कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी में सस्ते दर पर स्वाइन फ्लू की जांच के लिए अधिक प्रयोगशालाओं की स्थापना करे। न्यायालय ने कहा कि वह जांच की कीमत को कम करने को लेकर निर्देश नहीं दे सकता, क्योंकि इस संबंध में उपयुक्त प्राधिकार का गठन किया गया है, जिन्होंने इस मुद्दे पर ध्यान दिया है।
पीठ ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा सौंपे गए हलफनामे से यह स्पष्ट होता है कि इस बीमारी की रोकथाम तथा शोध की दिशा में काम पहले से ही जारी है।
न्यायलय ने कहा, "न्यायालय शहर को चलाने का भार अपने ऊपर नहीं ले सकता। प्रशासन की नाकामी का कोई मामला सामने नहीं आया है, जिसपर कोई कार्रवाई की जाए।"
इससे पहले, केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा था कि स्वाइन फ्लू पर वह राज्य सरकार की मदद कर रहा है।
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