
राजस्थान में अशोक गहलोत पर संकट और गहरा गया है. सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि सचिन पायलट (Sachin Pilot) दिल्ली में हैं और वह बीजेपी के नेताओं के संपर्क में है.सचिन पायलट का दावा है कि उनके पास 16 कांग्रेस और 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन है. वहीं सूत्रों का कहना है कि बीजेपी की ओर से कहा गया है कि पहले वह राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार गिराएं. हालांकि बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद देने से इनकार किया है. क्योंकि राज्य में नेतृत्व को लेकर बीजेपी खुद उहापोह की स्थिति में है. वसुंधरा राजे के समर्थन में 45 विधायक हैं. वहीं कांग्रेस आलाकमान ने भी सचिन पायलट से बात की है और सभी मुद्दों को समझाया है. कांग्रेस अशोक गहलोत से नाराज है क्योंकि विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में सचिन पायलट को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है. वहीं सचिन पायलट ने भी संकेत दिए हैं कि वह बीजेपी में नहीं जाएंगे लेकिन अपनी नई पार्टी जरूर बना सकते हैं. सचिन पायलट पूछताछ का नोटिस जारी होने से नाराज हैं.
वहीं सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन से पहले वह ज्योतिरादित्य सिंधिया से काफी चर्चा कर रहे थे. बीजेपी ने भी राज्यसभा चुनाव के समय राज्य में खेल करने करने की कोशिश की थी लेकिन नाकाम रही थी. लेकिन सचिन पायलट अब पूरी तरह से बड़ा फैसला लेने को तैयार हैं. दरअसल राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को प्रेस कॉन्फेंस करके कहा था कि उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए विधायकों को लालच दिया जा रहा है.
ऐसा ही आरोप राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के समय भी लगे थे. जिसकी जांच के लिए सीएम गहलोत ने एसओजी का गठन किया था. एसओजी 3 निर्दलीय विधायकों को पूछताछ के लिए बुलाया. साथ ही 10 जून को उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी समन भेज दिया. सचिन पायलट इसके बाद नाराज हो गए और उन्होंने इसको सीएम अशोक गहलोत की चाल बताया. क्योंकि गृहमंत्रालय भी उन्हीं के पास है और एसओजी उन्हीं के अधीन आता है. हालांकि एक समन सीएम को भी एसओजी ने भेजा है लेकिन पायलट समर्थक इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं. उनका कहना है कि पायलट को समन भेजकर प्रताड़ित करने की मंशा है.
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