
प्रतीकात्मक तस्वीर
मुंबई:
मालवणी मोरल पुलिसिंग मामले में निंदा की पात्र बनी मुंबई पुलिस अब और मुसीबत मोल नहीं लेना चाहती। यही कारण है कि मुंबई के पुलिस आयुक्त राकेश मरिया ने एक परिपत्र जारी कर सभी पुलिस थानों को सूचित किया है कि लड़के - लड़कियां या महिला और पुरुष क्या पहनें और कैसे रहें, यह देखना पुलिस का काम नहीं है। मॉल, होटल, और बाकी जगहों पर गश्त लगाते समय पुलिस उन्हें तंग न करे।
परिपत्रक में साफ लिखा है कि बार - बार इस तरह की हिदायत देने के बाद भी कुछ पुलिस वाले होटलों, मॉल और बंद कमरे में जाकर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाकर जोड़ों पर कार्रवाई कर रहे हैं। ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले मालवणी पुलिस ने मढ़ के कुछ होटेलों में जाकर कमरों में ठहरे युगल जोड़ों के खिलाफ कार्रवाई की थी। हिरासत में लिए गए सभी जोड़े वयस्क थे। इस मामले में पुलिस की खूब निंदा हुई। पुलिस आयुक्त राकेश मारिया को जांच का आदेश देना पड़ा।
इतना ही नहीं मालवणी मोरल पुलिसिंग मामले में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त के साथ गृह मंत्री से भी मामले में जवाब तलब किया है। याचिका की अगली सुनवाई 3 सितम्बर को है। उस दिन कोर्ट की फटकार से बचने के लिए ही शायद यह परिपत्र निकालकर सभी पुलिस थाना इंचार्जों को आदेश दिया गया है कि वे अपने मातहत सभी पुलिस कर्मियों को नए आदेश से अवगत कराएं। परिपत्र में यह चेतावनी भी दी गई है कि इसके बाद भी अगर कोई मोरल पुलिसिंग करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
परिपत्रक में यह भी लिखा गया है कि शहर की कानून और व्यवस्था के लिए संयुक्त आयुक्त के उस आदेश का भी पालन जरूरी है जिसमें कहा गया है कि 'पीटा' के तहत कोई भी कार्रवाई पुलिस उपायुक्त की अनुमति के बिना नहीं की जाए।
परिपत्रक में साफ लिखा है कि बार - बार इस तरह की हिदायत देने के बाद भी कुछ पुलिस वाले होटलों, मॉल और बंद कमरे में जाकर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाकर जोड़ों पर कार्रवाई कर रहे हैं। ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले मालवणी पुलिस ने मढ़ के कुछ होटेलों में जाकर कमरों में ठहरे युगल जोड़ों के खिलाफ कार्रवाई की थी। हिरासत में लिए गए सभी जोड़े वयस्क थे। इस मामले में पुलिस की खूब निंदा हुई। पुलिस आयुक्त राकेश मारिया को जांच का आदेश देना पड़ा।
इतना ही नहीं मालवणी मोरल पुलिसिंग मामले में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त के साथ गृह मंत्री से भी मामले में जवाब तलब किया है। याचिका की अगली सुनवाई 3 सितम्बर को है। उस दिन कोर्ट की फटकार से बचने के लिए ही शायद यह परिपत्र निकालकर सभी पुलिस थाना इंचार्जों को आदेश दिया गया है कि वे अपने मातहत सभी पुलिस कर्मियों को नए आदेश से अवगत कराएं। परिपत्र में यह चेतावनी भी दी गई है कि इसके बाद भी अगर कोई मोरल पुलिसिंग करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
परिपत्रक में यह भी लिखा गया है कि शहर की कानून और व्यवस्था के लिए संयुक्त आयुक्त के उस आदेश का भी पालन जरूरी है जिसमें कहा गया है कि 'पीटा' के तहत कोई भी कार्रवाई पुलिस उपायुक्त की अनुमति के बिना नहीं की जाए।
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