राहुल गांधी (फाइल फोटो)
- कामरूप जिले के सीजेएम की अदालत ने जारी किया समन
- आरएसएस के एक स्वयंसेवक ने दर्ज कराया था मामला
- राहुल गांधी पर कथित तौर पर आरएसएस की छवि धूमिल करने का आरोप
नई दिल्ली:
असम की एक अदालत ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में 29 सितंबर को पेश होने के लिए समन जारी किया है. यह समन कामरूप जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने जारी किया है.
मानहानि का मामला दायर करने वाले अंजन बोरा के वकील बिजन महाजन ने कहा, 'अंजन बोरा ने गुवाहाटी के सीजेएम की अदालत में आपराधिक मानहानि से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया है. अदालत ने सभी गवाहों के बयान के बाद आज (शनिवार) राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी कर उन्हें इस साल 29 सितंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवी बोरा ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित तौर पर आरएसएस की छवि धूमिल करने के लिए मानहानि का मामला दर्ज कराया है. बोरा का आरोप है कि राहुल ने मीडिया के समक्ष कहा था कि उन्हें पिछले साल दिसंबर में आरएसएस सदस्यों ने 'बारपेटा सत्र' (एक संस्थान) में प्रवेश नहीं करने दिया था.
बोरा ने कहा कि राहुल पिछले साल 12 दिसंबर को 15वीं सदी के बारपेटा सत्र का दौरा करने वाले थे, लेकिन उन्होंने सत्र में शामिल न होने का निर्णय लिया और इसके बदले उन्होंने बारपेटा शहर में एक रैली में हिस्सा लिया.
बोरा ने कहा कि हालांकि, राहुल ने नई दिल्ली में मीडिया से कहा कि उन्हें आरएसएस सदस्यों ने सत्र में प्रवेश नहीं करने दिया. बोरा ने साथ ही कहा कि आरएसएस सत्र का संचालन नहीं करता, इसलिए वह राहुल को रोक नहीं सकता था.
मानहानि का मामला दायर करने वाले अंजन बोरा के वकील बिजन महाजन ने कहा, 'अंजन बोरा ने गुवाहाटी के सीजेएम की अदालत में आपराधिक मानहानि से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया है. अदालत ने सभी गवाहों के बयान के बाद आज (शनिवार) राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी कर उन्हें इस साल 29 सितंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवी बोरा ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित तौर पर आरएसएस की छवि धूमिल करने के लिए मानहानि का मामला दर्ज कराया है. बोरा का आरोप है कि राहुल ने मीडिया के समक्ष कहा था कि उन्हें पिछले साल दिसंबर में आरएसएस सदस्यों ने 'बारपेटा सत्र' (एक संस्थान) में प्रवेश नहीं करने दिया था.
बोरा ने कहा कि राहुल पिछले साल 12 दिसंबर को 15वीं सदी के बारपेटा सत्र का दौरा करने वाले थे, लेकिन उन्होंने सत्र में शामिल न होने का निर्णय लिया और इसके बदले उन्होंने बारपेटा शहर में एक रैली में हिस्सा लिया.
बोरा ने कहा कि हालांकि, राहुल ने नई दिल्ली में मीडिया से कहा कि उन्हें आरएसएस सदस्यों ने सत्र में प्रवेश नहीं करने दिया. बोरा ने साथ ही कहा कि आरएसएस सत्र का संचालन नहीं करता, इसलिए वह राहुल को रोक नहीं सकता था.
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