
इससे पहले कि दिल्ली के सीएम और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी दस दिनों की मेडिकल लीव पूरी करके दिल्ली पहुंचते, पार्टी के दूसरे गुट के नेता बन चुके प्रशांत भूषण ने एक बयान दे दिया और कह दिया कि वो अरविंद केजरीवाल से बात करने के लिए समय मांग चुके हैं और केजरीवाल से मिलकर इस विवाद को खत्म करना चाहते हैं।
सवाल ये उठता है कि अचानक ऐसा क्या हो गया प्रशांत भूषण नरम पड़ गए? असल में कहानी ये है कि पार्टी ये फैसला ले चुकी है कि 28 मार्च को पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में प्रस्ताव लाकर दोनों को पीएसी के बाद राष्ट्रीय कार्याकारिणी से बाहर निकाल दिया जाएगा। कुमार विश्वास ने मध्यस्थता की कोशिश की लेकिन योगेंद्र गुट तैयार नहीं हुआ। उसके बाद योगेंद्र गुट ने नए मध्यस्थों के नाम सुझाए तो केजरीवाल गुट राजी नहीं हुआ।
फिर उसके बाद प्रशांत भूषण ने मिलने का समय मांगा लेकिन जब देखा कि बात नहीं बन रही तो उन्होंने मीडिया में ये बात कह दी जिससे असल में दबाव केजरीवाल पर आएगा और अगर अब वो मिलने से इनकार करते हैं तो संदेश जाएगा कि केजरीवाल ही अपनी बात पर अड़ रहे हैं।
अब सवाल ये है कि प्रशांत के नरम पड़ने से मामला सुलझ जाएगा? सूत्र कह रहे हैं नहीं ये अब नहीं हो सकता। लेकिन हां कुछ ऐसा ज़रूर हो सकता है जो अभी किसी ने सोचा नहीं होगा। इसलिए थोड़ा इंतज़ार कर लेते हैं कि केजरीवाल क्या करते हैं क्योंकि अब सारी नज़रें उन्हीं पर हैं।
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