नई दिल्ली:
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि लोकपाल विधेयक को जल्दबादी में पेश नहीं किया गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुखर्जी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक के जरिए सरकार ने विधेयक पर आम सहमति बनाने की कोशिश की। ज्ञात हो कि विधेयक पर चर्चा करते हुए कई राजनीतिक पार्टियों ने सरकार पर विधेयक जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया। इसका जवाब देते हुए सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने कहा कि विधेयक जल्दबाजी में पेश नहीं किया गया। गत अप्रैल महीने से इस विधेयक पर संसद के भीतर और बाहर चर्चा की गई। विधेयक का मौसदा तैयार करने के लिए संयुक्त समति गठित हुई जिसमें केंद्रीय मंत्रियों के साथ सामाजिक संगठन के सदस्य शामिल हुए। मुखर्जी ने 'सदन की भावना' का अपमान करने के विपक्ष के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि 27 अगस्त को लोकसभा में लोकपाल विधेयक में जिन तीन बिंदुओं- लोकपाल एवं लोकायुक्त संस्थाओं की एक कानून से स्थापना, सिटिजन चार्टर और निचली नौकरशाही को एक उपयुक्त तंत्र के जरिए लोकपाल के अधीन लाने पर जो सैद्धांतिक सहमति बनी। उन्हें संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में शामिल किया। मुखर्जी ने कहा कि सामाजिक संगठन के अलावा स्थायी समिति को कई संगठनों और संस्थाओं से सुझाव मिले और इन सुझावों को विधेयक में शामिल किया गया।
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