
सुशासन, निष्पादन और कार्यान्वयन पर जोर दे रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपनी 45-सदस्यीय मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई, जो तीन घंटे से अधिक चली। समझा जाता है कि मोदी ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने, अधिक निवेश तथा बुनियादी ढांचा सुधारने के बारे में अपने विचार मंत्रिपरिषद के सहयोगियों के समक्ष रखे।
समझा जाता है कि बातचीत के केंद्र में 100 दिन का एजेंडा रहा। मोदी ने मंत्रियों से कहा है कि वे प्राथमिकताओं की पहचान कर उनके कार्यान्वयन की दिशा में कार्य करें। सूत्रों ने बताया कि समझा जाता है कि मोदी ने शासन से जुड़े विभिन्न मसलों पर मंत्रियों के सुझाव भी मांगे। मोदी के 10-सूत्री एजेंडा के परिप्रेक्ष्य में यह बैठक हुई। 10-सूत्री एजेंडा में निवेश बढ़ाना, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करना तथा प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शामिल है।
प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों के सशक्तीकरण का फैसला पहले ही किया है। उन्होंने सभी उच्चाधिकार प्राप्त मंत्रीसमूह तथा मंत्रीसमूह भंग कर दिए। इससे पहले उन्होंने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से कहा था कि वे 100 दिन की समयसारिणी बनाएं और सुशासन, डिलीवरी एवं कार्यक्रमों तथा योजनाओं के कार्यान्वयन पर ध्यान देते हुए प्राथमिकताएं तय करें।
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