
महाराष्ट्र में भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन देने की घोषणा करने वाली राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने आज कहा कि फिर से चुनाव टालने के लिए यह फैसला किया गया था, लेकिन उन्होंने यह साफ किया कि उनकी पार्टी प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाएगी।
पवार ने कहा कि अल्पमत सरकार को समर्थन देने का फैसला 'सोच समझकर लिया गया और सामूहिक' था तथा यह भाजपा के साथ किसी 'गुप्त सौदे' का हिस्सा नहीं था।
उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'हमने अपने फैसले के बारे में किसी के साथ विचार विमर्श नहीं किया है। यह राज्य के व्यापक हितों के मद्देनजर सोच समझकर लिया गया और सामूहिक फैसला था। किसी ने हमसे समर्थन के लिए नहीं कहा। भाजपा हमारा समर्थन नहीं स्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है।'
पवार ने कहा कि चूंकि कांग्रेस और राकांपा वैकल्पिक सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थीं, ऐसे में फिर से चुनाव की स्थिति को टालने के लिए एकमात्र तरीका भाजपा सरकार को समर्थन देना था। उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्याएं ऐसी हैं कि वैकल्पिक सरकार की कोई संभावना नहीं है। हम नहीं चाहते कि राज्य में तत्काल एक और चुनाव हो।
पवार ने उन बातों को खारिज कर दिया कि राकांपा द्वारा भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन देना किसी 'गुप्त सौदे' का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'सरकार राकांपा नेताओं के खिलाफ सभी आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र है ताकि सच्चाई सामने आ सके। अगर उसके फैसले या विधेयक लोकोन्मुखी नहीं होंगे तो हम सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।' उन्होंने कहा, 'हालांकि राकांपा सरकार को अस्थिर नहीं करेगी लेकिन वह एक प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाएगी।'
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