
प्रतीकात्मक तस्वीर
मुजफ्फरपुर:
मौसम की दुश्वारियों की वजह से बिहार में लीची की फसल बर्बाद हो गई है। इससे एक ओर जहां फल उत्पादकों में निराशा है, वहीं फल में कीड़े लगने और खराब गुणवत्ता के चलते इस बार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अन्य गणमान्य लोग इसके शाही स्वाद से महरूम रह जाएंगे, क्योंकि हर साल की तरह उन्हें लज्जतदार और रसभरी लीची नहीं भेजी जा सकेगी।
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी अनुपम कुमार ने बताया कि बेमौसम बारिश के दौरान ओलावृष्टि के कारण इस बार लीची के फल में कीड़े लग गए हैं और खराब गुणवत्ता के चलते पुरानी परंपरा के अनुसार यहां से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अन्य गणमान्य लोगों को भेजी जाने वाली शाही लीची इस बार नहीं भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राज्य सरकार को सूचित कर दिया गया है।
ऐसा परंपरा रही है कि हर साल बिहार की शाही लीची का स्वाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अन्य गणमान्य लोगों को चखाने के लिए उसे मुजफ्फरपुर से दिल्ली स्थित बिहार भवन भेजा जाता रहा है।
अनुपम ने कहा कि गणमान्य लोगों को मुजफ्फरपुर से लीची भेजने की पुरानी परंपरा के अनुसार इस बार भी इस बार भी इसकी गुणवत्ता परखने के लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की मुजफ्फरपुर इकाई के वैज्ञानिक को बुलाया गया था। उन्होंने इस बार लीची की खराब गुणवत्ता के कारण इसे गणमान्य लोगों को न भेजने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि लीची की फसल बर्बाद होने को लेकर किसान और व्यापारी भी परेशान हैं और उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है।
अनुपम ने कहा कि लीची बारहमासी फसल के अंतर्गत आता है। इसके नुकसान को लेकर सर्वे करा लिया गया है जिन किसानों की 33 प्रतिशत से अधिक लीची की फसल बर्बाद होगी, उन्हें फसल क्षति मुआवजा मिलेगा।
मुजफ्फरपुर के लीची किसान भोला नाथ झा बीती 25 अप्रैल को आए उच्च तीव्रता वाले भूकंप के झटके और उसके बाद आए आफ्टर शाक्स को लीची की फसल की बर्बादी के लिए जिम्मेदार मानते हैं। उनके अनुसार भूकंप से पेड़ों के हिल जाने से उसके फीडर रूट्स क्षतिग्रस्त हो गए।
हालांकि राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की मुजफ्फरपुर इकाई के निदेशक विशाल नाथ ने कहा कि भूकंप के कारण लीची के फल में कीड़े पड़ने और उसकी गुणवत्ता में कमी आने का पूर्व में कोई वैज्ञानिक उदाहरण नहीं हैं और अगर ऐसा भूकंप के कारण हुआ है तो आम की फसल भी उससे प्रभावित होनी चाहिए थी, क्योंकि उसके भी फीडर रूट्स लीची के समान एक से डेढ़ मीटर जमीन के नीचे होते हैं।
देश में लीची का उत्पादन करीब छह लाख टन होता है और इसके उत्पादन में बिहार सबसे अग्रणी प्रदेश है। बिहार में करीब 31 हजार हेक्टयर में लीची उगाई जाती है और इसका यहां सालाना उत्पादन करीब तीन लाख टन है। मुजफ्फरपुर जिला जो कि शाही लीची के उत्पादन के लिए देश और दुनिया में मशहूर है में करीब 8 हजार हेक्टयर में लीची उगाई जाती है और यहां इसका वाषिर्क उत्पादन 50 हजार टन से अधिक है।
बिहार में आमतौर पर शाही और चायना लीची का उत्पादन होता है और इसके बागान मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर वैशाली, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर आदि जिलों में है।
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी अनुपम कुमार ने बताया कि बेमौसम बारिश के दौरान ओलावृष्टि के कारण इस बार लीची के फल में कीड़े लग गए हैं और खराब गुणवत्ता के चलते पुरानी परंपरा के अनुसार यहां से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अन्य गणमान्य लोगों को भेजी जाने वाली शाही लीची इस बार नहीं भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राज्य सरकार को सूचित कर दिया गया है।
ऐसा परंपरा रही है कि हर साल बिहार की शाही लीची का स्वाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अन्य गणमान्य लोगों को चखाने के लिए उसे मुजफ्फरपुर से दिल्ली स्थित बिहार भवन भेजा जाता रहा है।
अनुपम ने कहा कि गणमान्य लोगों को मुजफ्फरपुर से लीची भेजने की पुरानी परंपरा के अनुसार इस बार भी इस बार भी इसकी गुणवत्ता परखने के लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की मुजफ्फरपुर इकाई के वैज्ञानिक को बुलाया गया था। उन्होंने इस बार लीची की खराब गुणवत्ता के कारण इसे गणमान्य लोगों को न भेजने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि लीची की फसल बर्बाद होने को लेकर किसान और व्यापारी भी परेशान हैं और उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है।
अनुपम ने कहा कि लीची बारहमासी फसल के अंतर्गत आता है। इसके नुकसान को लेकर सर्वे करा लिया गया है जिन किसानों की 33 प्रतिशत से अधिक लीची की फसल बर्बाद होगी, उन्हें फसल क्षति मुआवजा मिलेगा।
मुजफ्फरपुर के लीची किसान भोला नाथ झा बीती 25 अप्रैल को आए उच्च तीव्रता वाले भूकंप के झटके और उसके बाद आए आफ्टर शाक्स को लीची की फसल की बर्बादी के लिए जिम्मेदार मानते हैं। उनके अनुसार भूकंप से पेड़ों के हिल जाने से उसके फीडर रूट्स क्षतिग्रस्त हो गए।
हालांकि राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की मुजफ्फरपुर इकाई के निदेशक विशाल नाथ ने कहा कि भूकंप के कारण लीची के फल में कीड़े पड़ने और उसकी गुणवत्ता में कमी आने का पूर्व में कोई वैज्ञानिक उदाहरण नहीं हैं और अगर ऐसा भूकंप के कारण हुआ है तो आम की फसल भी उससे प्रभावित होनी चाहिए थी, क्योंकि उसके भी फीडर रूट्स लीची के समान एक से डेढ़ मीटर जमीन के नीचे होते हैं।
देश में लीची का उत्पादन करीब छह लाख टन होता है और इसके उत्पादन में बिहार सबसे अग्रणी प्रदेश है। बिहार में करीब 31 हजार हेक्टयर में लीची उगाई जाती है और इसका यहां सालाना उत्पादन करीब तीन लाख टन है। मुजफ्फरपुर जिला जो कि शाही लीची के उत्पादन के लिए देश और दुनिया में मशहूर है में करीब 8 हजार हेक्टयर में लीची उगाई जाती है और यहां इसका वाषिर्क उत्पादन 50 हजार टन से अधिक है।
बिहार में आमतौर पर शाही और चायना लीची का उत्पादन होता है और इसके बागान मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर वैशाली, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर आदि जिलों में है।