
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों की हाल ही में हुई बैठकों की तुलना किसी 'थिंक टैंक' के अंदर होने वाले विचार-विमर्श से की।
इसके साथ ही राजनाथ ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सरकार का संचालन कर रहा है और बैठकें एनडीए सरकार के कामकाज के मूल्यांकन के लिए की गई थीं।
उन्होंने कहा, चाहे अर्थव्यवस्था हो, शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव, हमने देश से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा की। यह एक विचार मंच (थिंक टैंक) था, जिसमें सभी मुद्दों पर चर्चा की गई। मंत्री ने इस विचार को खारिज कर दिया कि संघ ने एनडीए सरकार के 15 महीने के कामकाज की समीक्षा की थी।
उन्होंने कहा, सरकार का कोई मूल्यांकन नहीं किया गया। अच्छे या बुरे (सरकार के प्रदर्शन) को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई। गृह मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि आरएसएस कभी निर्देश नहीं देता, बल्कि केवल सुझाव देता है और किसी सुझाव पर चर्चा करने में कुछ भी गलत नहीं है। राजनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री की तरह वह खुद भी आरएसएस के स्वयंसेवक हैं और किसी को भी इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष के आरोप कि मोदी सरकार को आरएसएस चला रही है, उन्होंने कहा, इसमें कोई सच्चाई नहीं है। यह पूरी तरह बेबुनियाद है। आरएसएस की तीन-दिवसीय 'समन्वय' बैठक के दौरान प्रधानमंत्री और कई वरिष्ठ मंत्रियों के साथ ही सरकार और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और संघ के शीर्ष नेताओं के साथ आमने-सामने बैठे थे। प्रधानमंत्री बैठक के आखिरी दिन चर्चा में शामिल हुए थे। कांग्रेस ने बैठक में शामिल होने के लिए मंत्रियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि आरएसएस रिमोट कंट्रोल से मोदी सरकार का संचालन कर रहा है।
इसके साथ ही राजनाथ ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सरकार का संचालन कर रहा है और बैठकें एनडीए सरकार के कामकाज के मूल्यांकन के लिए की गई थीं।
उन्होंने कहा, चाहे अर्थव्यवस्था हो, शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव, हमने देश से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा की। यह एक विचार मंच (थिंक टैंक) था, जिसमें सभी मुद्दों पर चर्चा की गई। मंत्री ने इस विचार को खारिज कर दिया कि संघ ने एनडीए सरकार के 15 महीने के कामकाज की समीक्षा की थी।
उन्होंने कहा, सरकार का कोई मूल्यांकन नहीं किया गया। अच्छे या बुरे (सरकार के प्रदर्शन) को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई। गृह मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि आरएसएस कभी निर्देश नहीं देता, बल्कि केवल सुझाव देता है और किसी सुझाव पर चर्चा करने में कुछ भी गलत नहीं है। राजनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री की तरह वह खुद भी आरएसएस के स्वयंसेवक हैं और किसी को भी इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष के आरोप कि मोदी सरकार को आरएसएस चला रही है, उन्होंने कहा, इसमें कोई सच्चाई नहीं है। यह पूरी तरह बेबुनियाद है। आरएसएस की तीन-दिवसीय 'समन्वय' बैठक के दौरान प्रधानमंत्री और कई वरिष्ठ मंत्रियों के साथ ही सरकार और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और संघ के शीर्ष नेताओं के साथ आमने-सामने बैठे थे। प्रधानमंत्री बैठक के आखिरी दिन चर्चा में शामिल हुए थे। कांग्रेस ने बैठक में शामिल होने के लिए मंत्रियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि आरएसएस रिमोट कंट्रोल से मोदी सरकार का संचालन कर रहा है।
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