वैष्णो देवी में भगदड़ : जिंदा बचे लोगों ने खराब इंतजाम को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया

माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में मची भगदड़ में 12 लोगों की मौत हुई और 20 अन्य घायल हुए. भगदड़ मंदिर के गर्भगृह के बाहर गेट नंबर तीन के पास हुई. माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू से करीब 50 किलोमीटर दूर त्रिकुटा पर्वत पर है.

जम्मू:

जम्मू के कटरा में साल के पहले दिन तड़के मां वैष्णो देवी मंदिर में मची भगदड़ में 12 लोगों की मौत हुई है. जिंदा बचे लोग इस भगदड़ के लिए स्थानीय एजेंसियों के खराब इंतजामों और कुप्रबंधन को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया. वैष्णो देवी मंदिर में मची भगदड़ के बीच जिंदा बचे कुछ लोगों ने कहा कि नए साल के पहले दिन दर्शन को लेकर अचानक बड़ी तादाद में श्रद्धालु यहां पहुंच गए.  भारी भीड़ के बीच भगदड़ मची और लोग एक दूसरे के ऊपर कुचलते चले गए. इन लोगों ने इस भयावह घटना के लिए कुप्रबंधन को दोषी ठहराया. 

बहरहाल, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यह कहते हुए आरोपों का खंडन किया कि संभावित भीड़ के मद्देनजर सभी आवश्यक प्रबंध किए गए थे. जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि एक मामूली लड़ाई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए जिम्मेदार है. हादसे में मारे गए अपने रिश्तेदार को पहचानने के लिए एक शवगृह के बाहर इंतजार कर रहे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से आए एक तीर्थयात्री ने कहा कि इस हादसे का कारण केवल खराब इंतजाम है. एजेंसियों को भीड़ बढ़ सकने की जानकारी थी, लेकिन लोगों को बेरोकटोक आने की अनुमति दी गई.

एक शख्स ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि अगर संबंधित अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों का बेहतर प्रबंधन किया होता, तो इस हादसे से बचा जा सकता था. ऐसी स्थिति कुछ मिनट पहले भी हुई थी, लेकिन सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ और हालात काबू में कर लिए गए थे. उसने कहा कि हम 10 श्रद्धालु साथ आए थे. हम सभी पड़ोसी हैं. भारी भीड़ के कारण भगदड़ मची, क्योंकि लोग अंदर-बाहर आ-जा रहे थे और हर कोई जल्दी में था. तीर्थयात्री ने कहा कि कई लोग वापस जाने के बजाय, जमीन पर आराम कर रहे थे और इसके कारण भवन में और भीड़ बढ़ गई. इस भगदड़ में अपने मित्र अरुण पी सिंह (30) को खो देने वाले एक युवक ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आए थे और भवन में बहुत भीड़ थी. उन्होंने कहा, वो करीब 10 साल पहले मंदिर आया था, लेकिन इस बार भारी भीड़ देखकर हैरानी हुई.

इस त्रासदी के बाद हम असहाय थे और हमें तड़के 6 बजे तक कोई मदद नहीं मिली. बिहार के मुजफ्फरपुर की रानी देवी ने कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि इस भगदड़ में उनकी मौत नहीं हुई. रानी देवी ने कहा कि उन्होंने कई लोगों को जमीन पर मृत पड़े देखा और और उनका दिल बुरी तरह टूट गया. उन्होंने इसके लिए भवन में श्रद्धालुओं की बेकाबू भीड़ को जिम्मेदार ठहराया. एक अन्य तीर्थयात्री आदित्य शर्मा ने कहा कि जमीन पर सो रहे कुछ लोग भगदड़ में कुचले गए. इस घटना के बाद कई तीर्थयात्रियों को दर्शन किए बिना ही मंदिर के आधार शिविर कटरा से लौटते देखा गया.

तीन बच्चों समेत अपने परिवार के पांच अन्य सदस्यों के साथ यहां आईं रेखा ने कहा कि हम पठानकोट से हैं. हम भगदड़ के कारण दर्शन किए बिना ही भवन से लौट गए. मध्य प्रदेश में ग्वालियर के रहने वाले प्रेम सिंह ने कहा कि भवन में पूरी तरह से अव्यवस्था का आलम था. न तो तीर्थयात्रियों की संख्या पर प्रतिबंध था और ना ही कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा था. सिंह ने दावा किया कि एक्सरे जांच केंद्र पर तैनात पुलिस कर्मी भारी भीड़ के आगे कुछ नहीं कर पा रहे थे. श्राइन बोर्ड के सीईओ रमेश कुमार हालात का जायजा लेने सबसे पहले पहुंचे लोगों में शामिल थे और उन्होंने नारायण अस्पताल में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की.

बोर्ड के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि तीर्थयात्रियों की भीड़ के कारण सुरक्षा समेत पर्याप्त प्रबंध किए गए थे. डीजीपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कुछ युवकों के बीच झगड़ा हुआ था और कुछ ही सेकेंड में भगदड़ के हालात बन गए. स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और भीड़ को तत्काल संभाला, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था.बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि यह इस मंदिर में हुई इस प्रकार की पहली घटना है.

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माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 12 लोगों की मौत हो गई है और 20 अन्य घायल हुए हैं. भगदड़ मंदिर के गर्भगृह के बाहर गेट नंबर तीन के पास हुई. माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू से करीब 50 किलोमीटर दूर त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है.