
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए कराई जा रही प्रवेश परीक्षाओं JEE-NEET को लेकर फिर सवाल उठाए हैं. केंद्र सरकार ने परीक्षाओं को टालने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद सोमवार को देशभर में यह परीक्षाएं शुरू हुई हैं. इसपर ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में पहले दिन बस 25 फीसदी बच्चे ही शामिल हो पाए.
उन्होंने कहा, 'JEE के पहले दिन बंगाल में बस 25 फीसदी बच्चे एग्जाम में शामिल हो पाए. 4,652 अभ्यर्थियों में से बस 1167 एग्जाम में शामिल हुए. यह बस 25% है. 75% बच्चों ने परीक्षा नहीं दी. यह परीक्षा कुछ दिनों बाद क्यों नहीं ली गई?'
बता दें कि इन परीक्षाओं को लेकर पूरे देशभर में हो-हल्ला मचा था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जहां परीक्षाएं कराने को लेकर अनुमति दे दी गई थी. केंद्र सरकार भी इसकी पूरी तैयारी कर चुकी थी. लेकिन देशभर से छात्रों का एक वर्ग इसका विरोध कर रहा था. इसके बाद कई राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध किया और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर परीक्षाएं टालने का आग्रह किया.
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इसे लेकर सोनिया गांधी ने कांग्रेस सहित गैर-बीजेपीशासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक वर्चुअल बैठक बुलाई थी. ममता बनर्जी ने इस मीटिंग में मामले को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था, 'सुप्रीम कोर्ट चलते हैं. इस मुद्दे पर बात करते हैं. यह छात्रों के लिए मानसिक प्रताड़ना है. मैंने किसी लोकतांत्रिक देश में इतनी उद्दंडता नहीं देखी है. स्थिति बहुत गंभीर है. हमें बच्चों के लिए आवाज उठानी ही होगी.'
बता दें कि कोविड-19 के कारण JEE (Mains) प्रवेश परीक्षा इससे पहले दो बार टाली जा चुकी हैं और अब ये 1 से 6 सितंबर के बीच निर्धारित हैं. शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि परीक्षाओं के लिए कोरोना के लिहाज से पूरी व्यवस्था की गई है.
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