
महाराष्ट्र के विधायकों का गुस्सा उबाल पर है। वजह बना है टोल प्लाजा के कर्मचारियों का विधायकों के साथ गुस्ताखी करना। शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानमंडल के मौजूदा बजट सत्र में यह मुद्दा बना।
राज्य के टोल पॉलिसी और उस से आम आदमी को होती परेशानी पर होनेवाली बहस के दौरान विधायकों ने अपनी पीड़ा रखी। कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य अनंत गाडगिल ने सदन में बताया कि टोल बूथ पर उनके साथ ठीक से बर्ताव नहीं होता। आईकार्ड दिखाए जाने के बावजूद उनसे तरह तरह के सवाल पूछे जाते हैं। गाडगिल की यह परेशानी भी थी कि टोल प्लाजा के कर्मचारी उनके आईकार्ड की छानबीन करते हैं।
जैसे ही सदन में यह मुद्दा उठा एक-एक कर अन्य सदस्य इस बहस में हामी भरते दिखे। कांग्रेस के अलावा एनसीपी के विधायको ने भी टोल प्लाजा पर उनके शान में गुस्ताखी होने की बात कही।
राष्ट्रीय टोल नीति के तहत जन प्रतिनिधियों को टोल से छूट है। यह छूट विधायक और सांसदों की सवारी को ही लागू है। लेकिन, यह पाया गया है कि कई बार विधायक या सांसद के न होने के बावजूद उनके नाम पर टोल से छूट मांगी जाती है। टोल कंपनियां इस के ख़िलाफ़ अपनी बात समय-समय पर रखती आ रही हैं। इसके चलते टोल प्लाजा पर छूट मांगने वालों के साथ सख्ती बरती जा रही है। इस दौरान यह मांग भी उठी की विधायकों के लिए अलग कतार बना दी जाए।
टोल प्लाज़ा पर होती सख्ती का महाराष्ट्र विधान परिषद में कई सदस्यों ने विरोध किया। जिस के चलते विधान परिषद के उप सभापति वसंत डावखरे को इस में हस्तक्षेप करना पड़ा। उप सभापति ने सरकार को निर्देश दिए कि सरकार सदन के सभासदों का टोल प्लाज़ा पर अवमान न हों इसलिए जरूरी कदम उठाए।
सदन की सामूहिक आवाज के सामने बीजेपी सरकार झुकती दिखाई दी। राज्य के लोकनिर्माण मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने संवाददातों को बताया कि सरकार जल्द ही सभी टोल प्लाजा चालकों के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी करेगी। इस सर्क्युलर में लोकप्रतिनिधियों से किस तरह पेश आए इस बाबत आचारसंहिता होगी।
वैसे, टोल प्लाजा पर विधायक जिस वीआईपी ट्रीटमेंट की मांग कर रहे हैं उसका विरोध आम जनता से हो रहा है। लोग इसे पसंद नहीं कर रहे।
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