'12 दिनों में ही विधवा', नगालैंड में स्पेशल फोर्सेज के ऑपरेशन में किसी ने खोया सुहाग तो किसी ने बुढ़ापे का सहारा

एक मां जिसे उम्मीद थी कि वह बुढ़ापे में बेटे के कंधों पर हाथ रखकर चल सकेगी, आज रो रही है. दूसरी ओर एक पिता जो कैंसर से जूझ रहे हैं, अब हताश, निराश, परेशान हैं. शनिवार को चंद लम्हों में लोगों की खुशियां मातम में बदल गईं, जब सेना के ऑपरेशन में 12 ग्रामीणों की मौत हो गई.

कोहिमा:

नगालैंड (Nagaland) के मोन जिले के ओटिंग गांव में मातम पसरा है. लोगों के चेहरे पर दुख और गुस्सा साफ देखा जा सकता है. एक युवती 12 दिनों पहले ही शादी कर यहां आई थी लेकिन सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज (Para Special Forces) के गलत पहचान के ऑपरेशन की वजह से अब वह विधवा हो चुकी है. इस गांव में बुजुर्गों के भी आंसू नहीं थम रहे, कइयों ने बुढ़ापे का सहारा खो दिया है. एक मां जिसे उम्मीद थी कि वह बुढ़ापे में बेटे के कंधों पर हाथ रखकर चल सकेगी, आज रो रही है. दूसरी ओर एक पिता जो कैंसर से जूझ रहे हैं, अब हताश, निराश, परेशान हैं.

शनिवार को तब चंद लम्हों में लोगों की खुशियां मातम में बदल गईं, जब सेना के एक गलत ऑपरेशन में 12 ग्रामीणों की मौत हो गई. नगालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब 300 किलोमीटर दूर, सैकड़ों ग्रामीणों ने सोमवार की रात गांव के 12 युवकों को नम आंखों से अंतिम विदाई दी, जिनकी मौत को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने "गलत पहचान" का मामला बताया है.

मोन शहर में आयोजित उनके अंतिम संस्कार में नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो सहित हजारों लोग शामिल हुए थे. बाद में शवों को उनके पैतृक गांव ओटिंग ले जाया गया और वहां उन्हें दफनाया गया. मृतकों में अधिकांश पुरुष एक कोयला खदान में काम करने वाले थे. 

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अंतिम संस्कार के विचलित कर देने वाले दृश्यों में ब्लैक ड्रेस में एक युवती एक ताबूत से चिपक कर चीत्कार करती हुई दिखी. उसकी दुनिया अब उजड़ चुकी थी. दो हफ्ते पहले ही 25 नवंबर को मोनलोंग की शादी हुई थी. तब पूरे गांव ने जश्न मनाया था लेकिन 12 दिन बाद ही अब वह अपने पति होकुप के अंतिम संस्कार में दहाड़ मार कर रो रही थी.

जहां उसकी शादी हुई थी, वहां अभी भी बांस के बल्ले खड़े थे लेकिन नियति देखिए, उसी जगह से थोड़ी दूर पर अब सामूहिक अंतिम संस्कार में लोगों को दफना दिया गया.

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मारे गए लोगों में नगमलेम का पति लैंगटुन भी शामिल था. एक साल से थोड़ा अधिक समय पहले विवाहित, Ngamlem को अब अपने दो महीने के बच्चे के साथ पूरी जिंदगी काटनी है. वह विलाप करने वालों से घिरी थी, उसी के बीच बोल पड़ीं, "भाई मैं बात नहीं कर सकती..." 

गांव में ही कुछ ही घर दूर, केमवांग,जो कैंसर रोगी हैं, यह विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि उनकी देखभाल करने वाला बेटा अब दुनिया में नहीं रहा.

केमवांग का बेटा, शोमवांग ने एक पिक-अप ट्रक खरीदा था और उसी से अपना और अपने परिवार का  जीवन यापन करता था. वह तिरु इलाके में एक कोयले की खदान से ग्रामीणों को ले जाता था. शनिवार को, जब विशेष बलों ने उनके ट्रक पर घात लगाकर हमला किया - कथित तौर पर यह मानते हुए कि यह विद्रोहियों को छिपा रहा था - पांच अन्य लोगों के साथ उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी.

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केमवांग ने विलाप करते हुए कहा, "उन्होंने मेरे मासूम बेटे को मार डाला ... मैं अंदर से टूट गया हूं. मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूंगा. मैं अस्वस्थ हो गया था, वह मेरा ख्याल रखता था ... वह चला गया. अब मैं पागल हो जाऊंगा, अब मैं क्या करूंगा... उन्होंने ऐसा क्यों किया?" 

एक अन्य माता-पिता का कहना है कि उसे नहीं लगता कि वह इस दर्द से ऊबर पाएगी. मारे गए लोगों में से एक यिनचोंग की मां न्यामन ने कहा, "मेरा दिल टुकड़ों में टूट गया है... मुझे नहीं पता कि इस दुख में क्या कहूं... यह दुख जीवन भर, लगातार बना रहेगा." .

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