
सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम को याचिका वापस लेने की इजाजजत दे दी है.
नई दिल्ली:
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम को अब अंतरिम राहत पाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में अंतरिम राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी. इसका प्रवर्तन निदेशालय ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह दूसरों के लिए एक गलत परंपरा स्थापित करेगा.
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीड ने उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि कार्ति का मामला उचित पीठ को आबंटित किया जाए ताकि वह इस पर कल सुनवाई कर सके.
पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय के पुरजोर विरोध के बावजूद इस संबंध में आदेश दिया. निदेशालय का कहना था कि कार्ति को याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए बल्कि सुनवाई के बाद इसका निस्तारण कर देना चाहिए. अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कार्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की इस दलील का विरोध किया कि उन्हें याचिका वापस लेने और अंतरिम राहत के लिए उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी जाए.
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सिब्बल ने इस मामले में उच्च न्यायालय में मामले का निपटारा होने तक प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी से कार्ति को एक सप्ताह का अंतरिम संरक्षण प्रदान करने का भी अनुरोध किया.
(इनपुट भाषा से)
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में अंतरिम राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी. इसका प्रवर्तन निदेशालय ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह दूसरों के लिए एक गलत परंपरा स्थापित करेगा.
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीड ने उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि कार्ति का मामला उचित पीठ को आबंटित किया जाए ताकि वह इस पर कल सुनवाई कर सके.
पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय के पुरजोर विरोध के बावजूद इस संबंध में आदेश दिया. निदेशालय का कहना था कि कार्ति को याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए बल्कि सुनवाई के बाद इसका निस्तारण कर देना चाहिए. अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कार्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की इस दलील का विरोध किया कि उन्हें याचिका वापस लेने और अंतरिम राहत के लिए उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी जाए.
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सिब्बल ने इस मामले में उच्च न्यायालय में मामले का निपटारा होने तक प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी से कार्ति को एक सप्ताह का अंतरिम संरक्षण प्रदान करने का भी अनुरोध किया.
(इनपुट भाषा से)
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