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This Article is From Jun 17, 2014

आईएनएस विक्रमादित्य : राष्ट्र की संपत्ति राष्ट्र को समर्पित!

आईएनएस विक्रमादित्य : राष्ट्र की संपत्ति राष्ट्र को समर्पित!
फाइल फोटो
नई दिल्ली:

'मेरे लिए अत्यंत गर्व और खुशी की बात है कि भारतीय नौसेना में आज विक्रमादित्य जुड़ रहा है' यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार यानी 14 जून को आइएनएस विक्रमादित्य पर कही। उसी शाम रक्षा मंत्रालय और पीएमओ की ओर से एक मेल जारी किया गया, जिसमें यह बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने विमानवाहक पोत आइएनएस विक्रमादित्य को राष्ट्र को समर्पित किया है। लेकिन क्या राष्ट्र की सेवा में पहले से लगी कोई चीज राष्ट्र के नाम फिर समर्पित की जा सकती है?

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि आईएनएस विक्रमादित्य पिछले साल ही नौसेना में कमीशंड यानी कि शामिल किया जा चुका है और इसके लिए खुद उस वक्त के रक्षामंत्री एके एंटोनी रूस गए थे। सेना में कमीशन का मतलब होता है कि आप राष्ट्र की सेवा में हैं। और तो और खुद नौसेना ने पिछले महीने मेल के जरिए यह जानकारी दी कि आइएनएस विक्रमादित्य ऑपरेशनल हो गया है। तो फिर से यह कैसे राष्ट्र को समर्पित हो सकता है? यह तो पहले से ही राष्ट्र की सेवा में है− अगर नहीं होता, तो फिर आईएनएस यानी इंडियन नेवल शिप और विक्रमादित्य कैसे मिलता?

इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी का विक्रमादित्य पर जाना न केवल नौसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बहुत बड़ी बात है। पूरी दुनिया को एक संदेश गया कि मोदी के लिए सेना कितना मायने रखता है। लेकिन क्या प्रधानमंत्री को यह जानकारी नहीं दी गई थी कि विक्रमादित्य राष्ट्र की संपत्ति हो चुका है, जिसे दुबारा राष्ट्र को सौंपा नहीं जा सकता।

यह कोई चूक नहीं सोची−समझी रणनीति थी, यह इस बात से स्पष्ट है कि नौसेना ने बाकायदा मेल भेज कर इसकी पुष्टि की। नौसेना में अपना नाम न छापने की शर्त पर कई अधिकारियों का कहना है कि यह सब नंबर बढ़ाने का खेल है। आखिर देश का प्रधानमंत्री देश के सबसे बड़े जंगी जहाज पर गया है तो फिर क्या..कुछ बड़ा तो कहना ही था ना.. तो क्या यहां मानें कि सेना में भी नंबर जुटाने का यह तमाशा शुरू हो गया है?

वैसे भी जिस तरह थल सेना के भावी सेना प्रमुख पर सरकार के मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख ने हमला किया और जिस तरह वरिष्ठता को नजरअंदाज कर नौसेना प्रमुख बनाया गया, उससे कई सारे सवाल पैदा हुए हैं और इसका सबसे ज्यादा नुकसान सेना को और उसकी साख को हुआ, जिससे उबर पाने में वक़्त लगेगा।

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