भारत की ओर से विदेश मंत्रालय की सचिव विदिशा मैत्रा
नई दिल्ली:
- पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल किया. इमरान खान का भाषण भड़काऊ और उनकी बोली हर बात झूठ है. उनका भाषण नफरत से भरा था.
- पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बदतर है और उनपर जुल्म हो रहे हैं. 1947 की तुलना में आज कुछ फीसदी भर अल्पसंख्यक बचे हैं. मानवाधिकार की बात करने वाले पाकिस्तान को सबसे पहले पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत देखनी चाहिए जिनकी संख्या 23 प्रतिशत से 3 प्रतिशत पर पहुंच गई है.
- विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान की पोल खोलते हुए कहा कि क्या पाकिस्तान इस बात को स्वीकार करेगा कि वो दुनिया का एकमात्र देश है जो वैसे शख्स को पेंशन देता है जिसे संयुक्त राष्ट्र ने अल कायदा और ISIS जैसे आतंकियों की लिस्ट में रखा है.
- क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार कर सकता है कि आज संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी करार दिए गए 130 लोग उसके देश में रहते हैं.
- क्या पाकिस्तान इससे इनकार कर सकता है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतबंधित 25 आतंकी संगठनों का ठिकाना पाकिस्तान है.
- विदिशा मैत्रा ने इमरान खान से पाक जमीं पर पल रहे आतंकवादियों का मुद्दा उठाया और सवाल किया, ''क्या इमरान खान पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 130 आतंकवादियों को नकार सकते हैं?''
- इसके अलावा विदिशा मैत्रा ने UN में कहा, ''दुनिया को पाकिस्तान में जाकर हालात देखना चाहिए. पाकिस्तान आतंकवाद पर और हम विकास पर जोर दे रहे हैं.
- भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि उन्हें 1971 के नियाजी का नरसंहार नहीं भूलना चाहिए.
- विदिशा मैत्रा ने कहा, ''UNGA में इमरान का भाषण दुर्भाग्यपूर्ण है और आतंक की फैक्ट्री चलाने वाले से नसीहत नहीं चाहिए. UN में सूचीबद्ध 155 आतंकी पाक में मौजूद हैं. पाकिस्तान मानवाधिकार का चैंपियन बनने की कोशिश में लगा हुआ है.''
- इतना ही नहीं, उन्होंने कहा, ''वह जो कभी क्रिकेटर थे और जेंटलमैन के खेल पर भरोसा रखते थे. आज उनका भाषण असभ्यता की चरम सीमा तक पहुंच गया है जो कि एकदम दारा आदम खल की बंदूकों की याद दिलाता है.''
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