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This Article is From Dec 24, 2015

शीतकालीन सत्र की बर्बादी के लिए सरकार जिम्मेदार : कांग्रेस

शीतकालीन सत्र की बर्बादी के लिए सरकार जिम्मेदार : कांग्रेस
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली: कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र की बर्बादी का आरोप बुधवार को सरकार पर लगाया और कहा कि कई मुद्दों पर विपक्ष को राय में नहीं लिया गया।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने शीतकालीन सत्र के बाद संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "सरकार के असहिष्णु, अहंकारी स्वभाव और विपक्ष के साथ टकराव की सोच के कारण राजनीतिक चर्चा में अभूतपूर्व कटुता आई और राजनीतिक वातावरण खराब हुआ।"

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "सरकार का यह कहना गलत है कि सत्र हमारे कारण बर्बाद हुआ.. सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।" खड़गे ने कहा कि सत्ताधारी गठबंधन ने लोकसभा में विपक्ष को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन चूंकि सरकार राज्यसभा में अल्पमत में है, लिहाजा विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा और इसलिए सरकार ने सत्र की बर्बादी का दोष कांग्रेस पर मढ़ दिया।

आजाद ने कहा कि विपक्ष को कम आंकने, और अनावश्यक रूप से बेइज्जत करने के सरकार के एजेंडे के कारण सरकार और विपक्ष के बीच किसी अर्थपूर्ण आदान-प्रदान की संभावना समाप्त हो गई और इस प्रक्रिया में संसद का सुचारु संचालन नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि सरकार को विचार-विमर्श के लिए आगे आना चाहिए।

आजाद ने कहा, "देश में राजनीतिक बातचीत में मौजूदा गतिरोध, जनता को किए वादे पूरा करने में भाजपा नेतृत्व की विफलता और शासन करने की अक्षमता का परिचायक है।" उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री की कार्यशैली तानाशाही जैसी है, जैसा कि पिछले 19 महीनों में देखने को मिला है। यह स्थिति शासन और संसदीय कामकाज, दोनों से निपटने में देखने को मिली है।"

आजाद ने कहा, "निर्णय लेने, नीतियों और सभी प्रमुख नियुक्तियों के केंद्रीकरण का सरकार की कार्यप्रणाली और प्रभावकता पर असर पड़ा है।" आजाद ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह अरुणाचल प्रदेश में लोकतंत्र, संघवाद और भारतीय संविधान की हत्या करने में लिप्त रही है। उन्होंने कहा, "राज्यपाल के उच्च पद का इस्तेमाल एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कांग्रेस की राज्य सरकार को 11 भाजपा सांसदों की मदद से बर्खास्त करने की कोशिश की गई।"

आजाद ने यह भी कहा कि संसद में कुछ दिनों तक इसलिए काम नहीं हो सका कि उनकी पार्टी ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और वी.के. सिंह तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व वसुंधरा राजे के इस्तीफे की मांग विभिन्न मुद्दों को लेकर की थी।

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