कोलकाता:
गोधरा ट्रेन अग्निकांड को दुर्घटना करार देने वाले न्यायमूर्ति यूसी बनर्जी ने बुधवार को कहा कि वह अपनी जांच आयोग की रिपोर्ट पर 200 प्रतिशत कायम रहेंगे और वह उससे बिल्कुल नहीं पलटेंगे। अहमदाबाद की एक विशेष अदालत द्वारा वर्ष 2002 में साबरमती एक्सप्रेस की एक कोच को आग लगाए जाने की घटना को साजिश बताए जाने के एक दिन बाद उच्चतम न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा कि उन्हें इस बात को लेकर आश्चर्य है कि अदालत ने मुख्य आरोपी मौलवी उमरजी को रिहा कर दिया है। न्यायमूर्ति बनर्जी ने हैदराबाद से फोन पर कहा, मैं अपने जांच आयोग की रिपोर्ट पर 200 प्रतिशत कायम हूं कि गोधरा स्टेशन पर 27 फरवरी 2002 को हुई यह घटना मात्र एक दुर्घटना थी और मैं उससे बिल्कुल नहीं पलटूंगा। उन्होंने शुरू में यह कहते हुए फैसले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि, मुझे अभी तक :विशेष अदालत की ओर से: फैसले की प्रति नहीं मिली है और वह अभी तक मुझे भेजी नहीं गई है। न्यायमूर्ति बनर्जी को संप्रग एक सरकार ने वर्ष 2005 में उस समय जांच समिति का प्रमुख बनाया था जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह जांच रिपोर्ट मामले के सभी पहलुओं पर गौर करने और 80 गवाहों की गवाही के बाद तैयार की थी। उल्लेखनीय है कि साबरमती एक्सप्रेस की कोच संख्या छह में आग लगने की इस घटना में 59 यात्री मारे गए थे जिसमें अधिकतर कारसेवक थे।
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