कृषि कानून वापसः ओवैसी बोले- ''आप कानून नहीं बनाते तो 750 किसानों की मौत नहीं होती''

ओवैसी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या बड़ा दिल दिखाया. 750 लोग मर गए. आपके सीने में धड़कता हुआ दिल होता तो, इतने लोग मरते ही नहीं. कौन सा बड़ा दिल दिखाया. यह गलत बात है.

कृषि कानून वापसः ओवैसी बोले- ''आप कानून नहीं बनाते तो 750 किसानों की मौत नहीं होती''

कृषि कानून वापसी पर असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार को घेरा. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

संसद के दोनों सदनों में आज तीनों कृषि कानून पर केंद्र सरकार का यू-टर्न देखने को मिला. सत्ता पक्ष ने बिना चर्चा के ही दोनों सदनों में कानून वापसी बिल पास करा लिया. जिसे लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. सरकार के इस रवैये पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि देखिए इस लोकसभा में जब कभी भी कानून वापस किया गया तो, चर्चा की गई. इस सरकार की जिद है कि चर्चा नहीं होनी चाहिए. इसमें उनको क्यों तकलीफ हो रही है? चर्चा होती तो एमएसपी की बात होती. किसानों के फायदे की बात होती, पर सरकार नहीं चाहती है. सरकार यह सोचती है कि जब हमारा मन करेगा तो गैर संवैधानिक तरीके से कानून बनाएंगे और जब हमारा मन करेगा हम उसको वापस ले लेंगे. ऐसा तो नहीं चल सकता.

ओवैसी ने कहा कि आप देश के प्रधानमंत्री हैं. आप नेपोलियन बोनोपार्ट या गयासुद्दीन बलबन तो नहीं है. फरमान जारी कर देंगे और वह कानून बन जायेगा. आप यह कानून नहीं बनाते तो 750 किसानों की मौत नहीं होती. किसानों को इतनी तकलीफ नहीं होती. सरकार की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आपने कानून इसलिए वापस लिया क्योंकि आपको चुनाव में हार नजर आने लगी. 


ओवैसी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या बड़ा दिल दिखाया. 750 लोग मर गए. आपके सीने में धड़कता हुआ दिल होता तो, इतने लोग मरते ही नहीं. कौन सा बड़ा दिल दिखाया. यह गलत बात है.  

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एआईएमआईएम सांसद ने कहा कि जो कृषि कानून का बिल वापस लिया गया, उसमें सरकार कह रही है.. छोटा सा किसानों का तबका इसे नहीं माना. भारत में एक बहुत बड़ा तबका है, जो संविधान को चाहता है, उसको मानता है. वह तबका कहता है कि सीएए गैरसंविधानिक है, मजहब के नाम पर कानून बनाकर राइट टू इक्वैलिटी का उल्लंघन किया गया है. भारत का एक बहुत बड़ा तबका सीएए को वापस करने की मांग करता है. इस मांग में मुसलमान भी शामिल हैं. मजहब के नाम पर कानून नहीं बना सकते. हम सरकार से मांग करते हैं कि सीएएम को भी वापस लिया जाए.