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This Article is From Jan 20, 2017

Exclusive : जानिए पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के भाषण से घंटों पहले क्या क्या हुआ था...

Exclusive : जानिए पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के भाषण से घंटों पहले क्या क्या हुआ था...
पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया था
नई दिल्ली: 8 नवंबर 2016 को राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने टीवी पर दिए भाषण में 500 और 1000 रुपए के नोट पर पाबंदी की घोषणा की थी. इसके तीन घंटे पहले रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड ने इस प्रतिबंध को मंज़ूरी दे दी थी. आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने शुक्रवार को दूसरी संसदीय समिति के सामने नोटबंदी की इस मुहिम के पहले हुई घटनाओं की कड़ी को समझाया. पटेल ने लोकलेखा समिति को बताया कि 8 नवंबर की शाम साढ़े पांच बजे उनकी अगुवाई में केंद्रीय बैंक के बोर्ड की बैठक हुई जहां एक दिन पहले सरकार द्वारा नोटबंदी के संबंध में भेजे गए परामर्श नोट को मंज़ूरी दे दी गई.

बुधवार को वह संसद की वित्तीय मामलों की समिति के सामने पेश हुए थे. आज शुक्रवार और बुधवार को उन्होंने जो दस्तावेज़ पेश किए, उनसे पता चलता है कि हालांकि सरकार और आरबीआई के बीच नोटबंदी पर चर्चा तो पिछले साल मई से शुरू हो चुकी थी. लेकिन 7 नवंबर को इस योजना ने पूरी स्पीड पकड़ी और 24 घंटे में इसे अमली जामा पहना दिया गया.

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जहां आरबीआई ने 500 और 1000 के नोटों को गैरकानूनी करार करने की प्रक्रिया पर काम करने का फैसला लिया, वहीं पीएम शाम सात बजे के बाद अपने दफ्तर में होने वाली कैबिनेट मीटिंग की तैयारी कर रहे थे. यहां मंत्रियों को सेलफोन साथ रखने की इजाज़त नहीं थी - यह फैसला सबसे पहले जुलाई में कैबिनेट बैठकों के लिए लिया गया था. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय की टीम जिन्हें पता था कि क्या चल रहा है, वह आरबीआई बोर्ड की ओर से आने वाली ख़बर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे.

तभी संदेश आया कि सरकार के प्रस्ताव पर 10 सदस्यों के आरबीआई बोर्ड ने एकमत होकर मुहर लगा दी है. ठीक इसके बाद पीएम मोदी करीब 7 बजकर 25 मिनट पर अपने घर से दफ्तर पहुंचे जहां उन्होंने कैबिनेट के सामने इस योजना का खुलासा किया. इसके बाद कैबिनेट ने नोटबंदी को एजेंडा बनाकर उसकी समीक्षा की और इसे अपनी मंज़ूरी दे दी. फिर रात 8 बजे पीएम टीवी और रेडियो पर देश को संबोधित कर रहे थे.

रात 8 बजे देश की जनता को बताया गया कि बाज़ार में चल रही 86 प्रतिशत मुद्रा यानि 15.44 लाख करोड़ रुपयों को 52 दिन में बाहर का रास्ता दिखाना है. आरबीआई भी तैयार था. 10 में से 8 बोर्ड सदस्यों ने दिल्ली में इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी. 9वां सदस्य विदेश में था और 10वां सदस्य केंद्रीय बैंक के मुंबई स्थित मुख्यालय में भारत के अब तक के सबसे बड़े आर्थिक फैसलों में से एक के तुरंत क्रियान्वयन में जुट चुका था.

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उच्च स्तरीय सूत्रों का कहना है कि दिखने में यह तुरंत लिया गया फैसला लगता है लेकिन इसकी योजना बिल्कुल भी जल्दबाज़ी में नहीं बनाई गई है. आरबीआई प्रमुख और इस बैंक के तीन डिप्टी गवर्नर मई महीने से लगातार मुबंई से दिल्ली जाकर पीएम मोदी द्वारा तैयार की गई (गुप्त) टीम से मिलते थे जिसमें वित्त मंत्रालय और पीएमओ के कुछ लोग शामिल थे. यह बैठक हर शुक्रवार शाम 6 बजे होती थी जहां विस्तार में होने वाले योजना सत्र में नोटबंदी के परिणामों की तैयारी पर चिंतन भी होता था. चूंकि बैठक को गुप्त रखा गया था इसलिए इसका विवरण भी रिकॉर्ड नहीं किया गया.

पटेल ने संसदीय पैनल से कहा कि आरबीआई सरकार के नोटबंदी के फैसले से सहमत थी क्योंकि वह मानती है कि यह कालेधन और जमाखोरी को बंद करने के लिए जरूरी है. जैसे ही इस फैसले की घोषणा की गई, शुक्रवार को होने वाली बैठकों के ब्लू्प्रिंट को इकट्ठा करके वित्तीय अपराध को देखने वाली आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियों से साझा किया गया.

सूत्रों की मानें तो डॉ रघुराम राजन भी अपने कार्यकाल के दौरान मई और अगस्त में इससे जुड़ी चर्चाओं में शामिल हुए थे. यह भी दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक के नेतृत्व में आए बदलाव की वजह से 2000 रुपए के नोट की छपाई में थोड़ी देरी जरूरी हुई. नए नोट को बाज़ार में लाने का फैसला कथित तौर पर जून में ही ले लिया गया था ताकि पुराने नोट बंद होते ही नए नोट आ जाएं. पीएम और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोट के डिजाइन और सुरक्षा फीचर्स पर मुहर भी लगा दी थी. लेकिन नए नोटों पर आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर चाहिए थे इसलिए उर्जित पटेल के दफ्तर आने से पहले यह काम थोड़ी देर के लिए अटक गया था. बाकी सभी जरूरतों को पूरा कर लिया गया था और पटेल के आते ही उनके हस्ताक्षर के साथ नोट छपाई के लिए भेज दिए गये थे.

बता दें कि नोटबंदी से हुई नगदी की भारी कमी ने आरबीआई को आलोचकों के कटघरे में खड़ा कर दिया है. केंद्रीय बैंक पर आरोप लगाया जा रहा है कि परिस्थिति को संभालने के लिए उनके पास किसी भी तरह के साफ दिशा निर्देश नहीं थे. लेकिन आरबीआई गवर्नर ने सफाई देते हुए यह साबित करने की कोशिश की है कि केंद्रीय बैंक के पास इस बात की सिर्फ जानकारी ही नहीं थी, बल्कि उन्होंने महीनों से चल रही तैयारी के साथ अपना रोल निभाया है.

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