
अहमदाबाद : गुजरात के अमरेली ज़िले में पिछले हफ्ते आई बाढ़ का पानी जैसै-जैसे उतर रहा है, तबाही की तस्वीरें नज़र आने लगी हैं।
करीब 40 लोगों की मौत की खबर तो पहले ही आ चुकी थी, लेकिन अब यह भी खबर है कि अमरेली के जंगलों में सैकड़ों पशु-पक्षियों की भी बाढ़ में मौत हो गई है। इनमें सबसे चौंकानेवाली खबर शेरों के बारे में आई है। अब तक आठ शेरों की मौत की खबर आई है।
शेरों की मौत की खबर ने वाइल्ड लाइफ से वास्ता रखनेवाले लोगों को तो चिंता में डाल ही दिया है, आम नागरिक भी शेरों की मौत की खबर से चिंता में हैं। आखिर बब्बर शेर पूरी दुनिया में सिर्फ गुजरात के इस इलाके में ही तो पाए जाते हैं। पिछले सालों में जैसे-जैसे शेरों की बस्ती बढ़ी वैसे-वैसे उनका विस्तार भी बढ़ता गया। गीर के जंगलों के अलावा अमरेली ज़िले में सबसे ज्यादा शेर रहते हैं। अंतिम शेरों की गणना के मुताबिक अमरेली के क्राकच और लीलिया इलाके के जंगलों में ही करीब 176 शेर रहते हैं।
इस बार जब बाढ़ आई तो शेत्रुंजी नदी का पानी इस इलाके में भी फैल गया। अब पानी उतरा है तो लोगों को कई जगहों पर शेरों के शव दिखाई दिए हैं।
अमरेली के क्राकच और लीलिया इलाके के शेर प्रेमियों का कहना है कि उन्होंने पहले ही वन विभाग को चेताया था कि मॉनसून की दस्तक से पहले ही इन शेरों को शेत्रुंजी नदी के मैदानी इलाकों से हटाकर पहाड़ी इलाकों में ले जाया जाना चाहिए, ताकि भारी बारिश की स्थिति में इनकी जान को कोई खतरा न हो। ये संरक्षित जानवर हैं और सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए ये अनमोल धरोहर हैं। इन्हें बचाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उनका आरोप है कि वन विभाग ने उनकी चेतावनी को हल्के में लिया, जिसका नतीजा ये है कि इतने शरों की अब तक मौत हो चुकी है। अभी ये संख्या बढ़ने की भी आशंका है।
दूसरी ओर वन विभाग का कहना है कि मॉनसून के पहले ही कई शेरों को संवेदनशील इलाकों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था। वन विभाग का कहना है कि फिर भी इतने शेरों की मौत चिंता की बात है और स्थानीय लोगों से मिलकर अभी और शेरों की तलाश की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाएगा।
सभी को लगता है कि जैसे शेरों की गिनती में आधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाता है, ठीक उसी तरह प्राकृतिक आपदा के वक्त भी उन्हें बचाने के लिए भी आधुनिक टेक्नोलोजी का प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि इस बहुमूल्य धरोहर को समय रहते बचाया जा सके।
करीब 40 लोगों की मौत की खबर तो पहले ही आ चुकी थी, लेकिन अब यह भी खबर है कि अमरेली के जंगलों में सैकड़ों पशु-पक्षियों की भी बाढ़ में मौत हो गई है। इनमें सबसे चौंकानेवाली खबर शेरों के बारे में आई है। अब तक आठ शेरों की मौत की खबर आई है।
शेरों की मौत की खबर ने वाइल्ड लाइफ से वास्ता रखनेवाले लोगों को तो चिंता में डाल ही दिया है, आम नागरिक भी शेरों की मौत की खबर से चिंता में हैं। आखिर बब्बर शेर पूरी दुनिया में सिर्फ गुजरात के इस इलाके में ही तो पाए जाते हैं। पिछले सालों में जैसे-जैसे शेरों की बस्ती बढ़ी वैसे-वैसे उनका विस्तार भी बढ़ता गया। गीर के जंगलों के अलावा अमरेली ज़िले में सबसे ज्यादा शेर रहते हैं। अंतिम शेरों की गणना के मुताबिक अमरेली के क्राकच और लीलिया इलाके के जंगलों में ही करीब 176 शेर रहते हैं।
इस बार जब बाढ़ आई तो शेत्रुंजी नदी का पानी इस इलाके में भी फैल गया। अब पानी उतरा है तो लोगों को कई जगहों पर शेरों के शव दिखाई दिए हैं।
अमरेली के क्राकच और लीलिया इलाके के शेर प्रेमियों का कहना है कि उन्होंने पहले ही वन विभाग को चेताया था कि मॉनसून की दस्तक से पहले ही इन शेरों को शेत्रुंजी नदी के मैदानी इलाकों से हटाकर पहाड़ी इलाकों में ले जाया जाना चाहिए, ताकि भारी बारिश की स्थिति में इनकी जान को कोई खतरा न हो। ये संरक्षित जानवर हैं और सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए ये अनमोल धरोहर हैं। इन्हें बचाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उनका आरोप है कि वन विभाग ने उनकी चेतावनी को हल्के में लिया, जिसका नतीजा ये है कि इतने शरों की अब तक मौत हो चुकी है। अभी ये संख्या बढ़ने की भी आशंका है।
दूसरी ओर वन विभाग का कहना है कि मॉनसून के पहले ही कई शेरों को संवेदनशील इलाकों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था। वन विभाग का कहना है कि फिर भी इतने शेरों की मौत चिंता की बात है और स्थानीय लोगों से मिलकर अभी और शेरों की तलाश की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाएगा।
सभी को लगता है कि जैसे शेरों की गिनती में आधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाता है, ठीक उसी तरह प्राकृतिक आपदा के वक्त भी उन्हें बचाने के लिए भी आधुनिक टेक्नोलोजी का प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि इस बहुमूल्य धरोहर को समय रहते बचाया जा सके।
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