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This Article is From Feb 28, 2013

बाजीगरी का बजट, आर्थिक संकट गहराएगा : यशवंत सिन्हा

नई दिल्ली: पूर्व वित्तमंत्री और बीजेपी सांसद यशवंत सिन्हा ने गुरुवार को पेश आम बजट को 'बाजीगरी का बजट' करार देते हुए कहा कि वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने जो बजट पेश किया है, उससे लगता है कि भविष्य में आर्थिक संकट और गहराएगा।

यशवंत सिन्हा ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति आदि की चुनौतियों के बीच इनके आंकड़ों में बाजीगरी की गई है। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री ने राजकोषीय घाटे को 5.2 फीसदी पर रखने का श्रेय लिया है, जबकि केलकर समिति ने इसे 5.3 फीसदी रखने की सिफारिश की थी। राजकोषीय घाटा अगले साल 4.8 फीसदी पर रखने का लक्ष्य रखा है। देखते हैं यह कहां तक सही रहता है।

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए धन की कमी नहीं, बल्कि परियोजनाओं को मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरियों की समस्याएं रहती हैं, जिस पर चिदंबरम ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने एनडीए सरकार द्वारा प्रस्तावित महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना पर कुछ नहीं कहा, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती थी। सिन्हा ने कहा कि वित्तमंत्री ने विदेशी निवेश पर बड़े जोर देकर अपनी बात कही जैसे विदेशी निवेश से ही सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी और देश अपने दम पर नहीं, बल्कि विदेशी मदद से आर्थिक विकास करेगा। यही यूपीए का फॉर्मूला है।

उन्होंने कहा कि सरकार खाद्य सुरक्षा विधेयक को इसी सत्र में लाने का दावा कर रही है, जिसके लिए बजट में 10 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित है, जबकि विशेषज्ञ इस कानून के लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था पर एक लाख करोड़ रुपये के भार का अनुमान लगा रहे हैं। सिन्हा के मुताबिक सबसे ज्यादा निराशा इस बात से हुई कि प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक के संबंध में स्थायी समिति द्वारा पिछले साल 9 मार्च को ही रिपोर्ट दिए जाने के बाद भी इस पर कोई अमल नहीं हुआ। अच्छा होता कि चिदंबरम नया आयकर कानून लाते, लेकिन उन्होंने अस्थायी बदलाव ही किए हैं।

बीजेपी नेता ने हालांकि आवास पर आयकर में एक लाख रुपये की अतिरिक्त कर छूट का स्वागत करते हुए कहा कि करीब एक दशक बाद आवास क्षेत्र में इस तरह की राहत दी गई है। इससे पहले एनडीए सरकार ने इस पर 1.5 लाख रुपये की छूट दी थी। सिन्हा ने कहा कि चिदंबरम ने उत्पाद शुल्क में कुछ खास नहीं किया। अलग-अलग उत्पादों पर घटत-बढ़त करने की बजाय इसमें एकरूपता लानी चाहिए थी। इस बजट में वस्तु एवं सेवा शुल्क (जीएसटी) के लिए भी कोई रोडमैप नहीं है।

हालांकि केंद्रीय बिक्री शुल्क (सीएसटी) में राज्यों को मुआवजे के तौर पर 9,000 करोड़ रुपये के आवंटन के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि हम इसकी मांग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बजट से स्पष्ट है कि करीब 18 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर भार लोगों पर पड़ेगा, जिसमें प्रत्यक्ष कर पर 13,000 करोड़ रुपये और अप्रत्यक्ष कर पर 4,700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ रहेगा। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। सिन्हा ने कहा कि देश के सामने निवेश का बड़ा संकट है और इसमें जान डालने के लिए कोई उम्मीद वाला सुझाव इस बजट में नहीं हैं। इससे निवेशकों का उत्साह नहीं बढ़ेगा। विश्वास में कमी बनी रहेगी।

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