
नई दिल्ली:
दिल्ली में पिछले वर्ष 16 दिसंबर को चलती बस में हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) उषा मेहरा आयोग ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अश्विनी कुमार और केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने रिपोर्ट प्राप्त की।
एक युवती के साथ हुई बर्बरतापूर्ण घटना के विभिन्न आयामों की जांच के लिए इस आयोग का गठन 26 दिसंबर 2012 को हुआ था। आयोग को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। आयोग ने यह काम समय से पहले ही पूरा कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस और परिवहन विभाग के बीच तालमेल के अभाव के कारण ही 16 दिसंबर के सामूहिक बलात्कार कांड में प्रयुक्त बस बेरोक-टोक सड़क पर चलती रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनसीआर और एनसीटी की पुलिस के बीच असहयोग के चलते अपराधी एक स्थान से दूसरे स्थान भाग जाते हैं। इस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर इस रिपोर्ट में जोर दिया गया है।
एक युवती के साथ हुई बर्बरतापूर्ण घटना के विभिन्न आयामों की जांच के लिए इस आयोग का गठन 26 दिसंबर 2012 को हुआ था। आयोग को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। आयोग ने यह काम समय से पहले ही पूरा कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस और परिवहन विभाग के बीच तालमेल के अभाव के कारण ही 16 दिसंबर के सामूहिक बलात्कार कांड में प्रयुक्त बस बेरोक-टोक सड़क पर चलती रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनसीआर और एनसीटी की पुलिस के बीच असहयोग के चलते अपराधी एक स्थान से दूसरे स्थान भाग जाते हैं। इस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर इस रिपोर्ट में जोर दिया गया है।
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