कोरोना प्रकोप के दौरान कैदियों की जेल से अस्‍थायी रिहाई को लेकर अर्जी, HC ने केंद्र, दिल्‍ली सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने विधि एवं स्वास्थ्य मंत्रालयों, दिल्ली सरकार, पुलिस, उपराज्यपाल कार्यालय और कारागार महानिदेशक को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना रुख बताने को कहा है.

कोरोना प्रकोप के दौरान कैदियों की जेल से अस्‍थायी रिहाई को लेकर अर्जी, HC ने केंद्र, दिल्‍ली सरकार से मांगा जवाब

तीन वकीलों और विधि के एक छात्र ने HC में यह याचिका दायर की है (प्रतीकात्‍मक फोटो)

खास बातें

  • तीन वकीलों और विधि के एक छात्र ने दायर की याचिका
  • कहा, कोरोना काल में जेलों में भीड़ कम करने की जरूरत
  • जेलों में इस समय क्षमता से अधिक कैदी हैं मौजूद
नई दिल्ली:

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi Highcourt) ने कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) के प्रसार के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी की तीन जेलों में बंद गैर-जघन्य अपराधों में शामिल कैदियों की जमानत या पैरोल पर अस्थायी रिहाई के अनुरोध वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को केंद्र, दिल्ली सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा है. दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने विधि एवं स्वास्थ्य मंत्रालयों, दिल्ली सरकार, पुलिस, उपराज्यपाल कार्यालय और कारागार महानिदेशक को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना रुख बताने को कहा है. तीन वकीलों और विधि के एक छात्र ने चार मई को यह याचिका दायर की है.

जजों के लिए फाइव स्टार होटल में 100 बेडों की सुविधा कभी नहीं मांगी: दिल्ली हाईकोर्ट

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील अजय वर्मा ने अदालत को बताया कि हाल में तिहाड़ जेल में 190 कैदी और जेल के 304 कर्मी कोविड-19 से संक्रमित पाये गये और संक्रमण पूरी जेल में फैल रहा है. याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ऐसे वक्त में जब कोविड-19 का संक्रमण तेजी से फैल रहा है तब जेलों में भीड़ कम करने की आवश्यकता है क्योंकि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी मौजूद हैं.याचिका में कहा गया है, ‘‘तीन जेलों - तिहाड़, मंडोली और रोहिणी में कुल 10,026 कैदियों के रहने की क्षमता है जबकि सात अप्रैल तक वहां 17,285 कैदी थे.''


'हम हाईकोर्ट को सुनवाई से नहीं रोक रहे, लेकिन मूकदर्शक नहीं बन सकते' : सुप्रीम कोर्ट

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


याचिकाकर्ता वकील - शोभा गुप्ता, राजेश सचदेव और आयुषी नागर तथा विधि छात्र संस्कृति गुप्ता ने तिहाड़ जेल, मंडोली जेल और रोहिणी जेल में बंद ‘‘सभी विचाराधीन एवं गैर-जघन्य अपराध के मामलों में जुर्माना तथा अधिकतम सात साल कैद की सजा काट रहे कैदियों'' को अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहा करने का अनुरोध किया है.उन्होंने अदालत से पूर्व में रिहा किये गये कैदियों और आत्मसमर्पण करने वाले कैदियों को अच्छे आचरण के आधार पर तथा किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदियों को रिहा करने का भी अनुरोध किया है.



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)