
पीएल पूनिया
नई दिल्ली:
CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू द्वारा महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने के बाद कांग्रेस ने कहा कि पार्टी और अन्य विपक्षी दल इस मसले पर कानून विशेषज्ञों से बात करेंगे. इसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा. कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने कहा कि यह वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण मामला है. हमें नहीं पता कि महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने के पीछे क्या वजह थी. कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर कानून विशेषज्ञों से बात करने के बाद अगला कदम उठाएंगे. कहा जा रहा है कि महाभियोग नोटिस पर दस्तखत करने वाले राज्यसभा सदस्य इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है.
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दूसरी तरफ, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने CJI के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव किस आधार पर खारिज किया. इस पर राज्यसभा के 64 सदस्यों के दस्तखत थे. उनके पास मेरिट के आधार पर रिजेक्ट करने का अधिकार नहीं हैं. यह अधिकार तीन जजों की जांच समिति के पास है.
इससे पहले महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने के बाद राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्होंने इस मसले पर विशेषज्ञों की राय ली. साथ ही नोटिस में महाभियोग के लिए आधार बनाए गए पांच बिंदुओं और इससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की. इसमें दुर्व्यवहार या नाकाबलियत के बारे में ठोस, विश्वसनीय जानकारी नहीं मिली. वेंकैया नायडू ने कहा कि, 'मुझे लगा कि इस मामले को लंबा खींचना उचित नहीं है और यह तकनीकी तौर पर किसी भी तरह से मंजूर करने लायक नहीं है'. इसके बाद यह निर्णय लिया गया.
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दूसरी तरफ, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने CJI के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव किस आधार पर खारिज किया. इस पर राज्यसभा के 64 सदस्यों के दस्तखत थे. उनके पास मेरिट के आधार पर रिजेक्ट करने का अधिकार नहीं हैं. यह अधिकार तीन जजों की जांच समिति के पास है.
इससे पहले महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने के बाद राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्होंने इस मसले पर विशेषज्ञों की राय ली. साथ ही नोटिस में महाभियोग के लिए आधार बनाए गए पांच बिंदुओं और इससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की. इसमें दुर्व्यवहार या नाकाबलियत के बारे में ठोस, विश्वसनीय जानकारी नहीं मिली. वेंकैया नायडू ने कहा कि, 'मुझे लगा कि इस मामले को लंबा खींचना उचित नहीं है और यह तकनीकी तौर पर किसी भी तरह से मंजूर करने लायक नहीं है'. इसके बाद यह निर्णय लिया गया.
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