शिवसेना नेता संजय राउत (Shivsena Leader Sanjay Raut) ने गुरुवार को कांग्रेस में नेतृत्व पर चल रहे संकट (Congress Leadership Crisis) पर कहा कि कांग्रेस पार्टी को खुद में नई जान डालनी पड़ेगी क्योंकि देश को एक मजबूत विपक्षी पार्टी की जरूरत और राहुल गांधी ही ऐसे अकेले नेता हैं, जिनको स'र्वसम्मति से स्वीकार्यता' मिली हुई है. बता दें कि कांग्रेस और शिवेसना लंबे समय से एक दूसरे की प्रतिद्वंदी रही हैं, लेकिन पिछले साल दोनों पार्टियों ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी साथ मिलकर महाराष्ट्र में महाअघाड़ी की सरकार बनाई है.
न्यूज एजेंसी PTI के हवाले से शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा कि 'देश को एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है और कांग्रेस की पूरे देश में पहचान है. पार्टी को अंदरूनी परेशानियों से ऊपर उठकर काम करना होगा.' उन्होंने कहा, 'सोनिया गांधी की उम्र हो रही है और मैं प्रियंका गांधी को फुल टाइम पॉलिटिक्स में नहीं देखता हूं. पार्टी में बहुत से वरिष्ठ नेता हैं, जिनकी वजह से राहुल गांधी काम नहीं कर पाते हैं. मैं कांग्रेस में अध्यक्ष के तौर पर एक गैर-गांधी अध्यक्ष नहीं देख पा रहा हूं.'
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बता दें कि इसके पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया था कि 23 नेताओं की ओर से 'फुल टाइम' अध्यक्ष की मांग करते हुए लिखी गई चिट्ठी 'राहुल गांधी के नेतृत्व को खत्म करने की साजिश है.' संपादकीय में सवाल उठाए गए कि ये नेता तब कहां थे, जब बीजेपी राहुल गांधी पर अपमानजनक हमले कर रही थी और जब राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, तब इन नेताओं ने पार्टी को रिवाइव करने की जिम्मेदारी क्यों नहीं ली?
संपादकीय में लिखा गया, 'जब पार्टी के अंदर से ही राहुल गांधी को खत्म करने की साजिश होगी, तब तो पार्टी में 'पानीपत' (हार) ही होगा...इन पुराने नेताओं ने राहुल गांधी को अंदर से ही ऐसा नुकसान पहुंचाया जैसा बीजेपी ने भी नहीं किया होगा.'
बता दें कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं सहित 20 से ज्यादा नेताओं ने कांग्रेस में नेतृत्व में बदलाव की मांग करते हुए चिट्ठी लिखी थी, जो लीक हो गया था. इस चिट्ठी के सामने आने के बाद कांग्रेस में तूफान मच गया और सोमवार को कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी. इस मीटिंग में आखिरी फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी फिलहाल अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी.
(PTI से इनपुट के साथ)
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