
पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प भारत सरकार द्वारा इलाके में सड़क जैसे बुनियादी ढांचे बनाए जाने के चलते हुई है. यह जानकारी सूत्रों ने एनडीटीवी को दी है. बता दें कि सोमवार को गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों की जान इस हिंसक झड़प में चली गई.विपक्ष की आलोचना के जवाब में सूत्र ने पहले की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार ने बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट को टाले रखा. ग्रीन क्लीयरेंस के नाम पर मामले को लटकाया जाता रहा. यहां तक कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने भी पर्यावरण मंत्री होते हुए भी मामले में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई.
सूत्र ने कहा,"सीमा पर होने वाली झड़प कमजोरी या बुरे संबंधों की निशानी नही हैं बल्कि यह दिखाता है कि भारतीय सेना बेहतर मॉनिटर कर सकती है,चीनी सेना की पैट्रोलिंग का जवाब दे सकती है. जैसे-जैसे इलाके में बुनियादी ढांचा मजबूत होता जाएगा इसकी संभावनाएं और भी बढे़ंगी.' भारत-चीन की स्थिति को देखते हुए ज्यादातर विशेषज्ञों ने कहा है कि सरकार द्वारा रोड और एयरफील्ड बनाने और यातायात को बेहतर करने से चीन और भारत के बुनियादी ढांचा के बीच का फर्क कम होता जा रहा है. यही इस झड़प की मुख्य वजह भी है.
सूत्र ने कहा कि गलवान में चीन की आपत्ति के बावजूद भारत ने बीते साल अक्टूबर में एयरफील्ड तक जाने वाली एक सड़क को पूरा किया है. चीन के साथ सीमा पर सड़क निर्माण मोदी सरकार द्वारा सत्ता में आने पर लिए जाने वाले फैसलों मे एक अहम फैसला था.
जुलाई 2014 में पीएम मोदी ने सड़क निर्माण के लिए इजाजत दी. मोदी सरकार ने 66 अहम भारत-चीन सीमा रोड बनाने को मंजूरी दी. मोदी सरकार ने आधुनिक निर्माण उपकरणों का इस्तेमाल किया. पहले के मुकाबले सड़कों , सुरंग और पुलों का निर्माण तेजी से किया गया.
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