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This Article is From Dec 13, 2019

Citizenship Bill: नागरिकता बिल के खिलाफ SC पहुंचीं TMC सांसद महुआ मोइत्रा, अब तक 4 याचिकाएं दाखिल

नागरिकता संशोधन कानून का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) भी CAB के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंच गई हैं. बिल के खिलाफ अब तक कुल चार याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं.

Citizenship Bill: नागरिकता बिल के खिलाफ SC पहुंचीं TMC सांसद महुआ मोइत्रा, अब तक 4 याचिकाएं दाखिल
महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से टीएमसी सांसद हैं. (फाइल फोटो)
  • महुआ मोइत्रा ने CAB के खिलाफ दाखिल की याचिका
  • पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से सांसद हैं महुआ मोइत्रा
  • CAB के खिलाफ SC में 4 याचिकाएं दाखिल
नई दिल्ली:

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill या CAB) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दस्तखत के बाद कानून बन चुका है. इस कानून के खिलाफ पूर्वोत्तर राज्यों में काफी प्रदर्शन हो रहा है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इसे तत्काल रद्द किया जाए. नागरिकता संशोधन कानून का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) भी 'कैब' के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंच गई हैं. शुक्रवार को उन्होंने चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े से केस की जल्द सुनवाई की मांग की है. मुख्य न्यायाधीश ने उनसे कहा कि आज (शुक्रवार) सुनवाई नहीं होगी, आप रजिस्ट्रार के पास जाएं.

राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद नागरिकता संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली पहली याचिका वकील एहतेशाम हाशमी ने दाखिल की है. याचिका में एक्ट को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की गई है. पिटीशन में इस बात का भी जिक्र है कि यह एक्ट धर्म और समानता के आधार पर भेदभाव करता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम समुदाय के जीवन, निजी स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करे.

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पीस पार्टी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में कानून को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की गई है. पार्टी का कहना है कि यह कानून भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है. यह संविधान की मूल संरचना / प्रस्तावना के खिलाफ है. धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती. अगर इसका उद्देश्य पड़ोसी देशों - जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक वर्ग के उत्पीड़ित लोगों को नागरिकता देना है तो अन्य पड़ोसी देशों यानी चीन, भूटान और श्रीलंका में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों पर विचार क्यों नहीं किया गया, जिन्हें उनके देशों में भी सताया जा रहा है. उत्पीड़न केवल धर्म के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि यह अन्य कारणों जैसे राजनीतिक, भाषा या लिंग के आधार पर भी होता है. तो फिर क्यों इस कानून में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है.

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बताते चलें कि नागरिकता संशोधन विधेयक बीते बुधवार को राज्यसभा से पारित हुआ था. अगले दिन यानी गुरुवार को 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची. संगठन की याचिका में भी इस बिल को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि यह बिल धर्म के आधार पर वर्गीकरण कर रहा है. कहा जा रहा है कि लीग की ओर से कपिल सिब्बल इस मामले की पैरवी कर सकते हैं.

Video: हम चाहते हैं कि हालात बदले, वहां शांति हो: कपिल सिब्बल

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