
प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली:
आधार जारी करने वाले यूआईडीएआई ने शुक्रवार को कहा कि सेवा प्रदाता कंपनियां ई-आधार या क्यूआर कोड जैसी ऑफलाइन तकनीकों से किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि कर सकते हैं. उसने कहा कि इसके लिए बायोमैट्रिक आंकड़ों या 12 अंक की आधार संख्या को जाहिर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के संदर्भ में यह बयान जारी किया है. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कई सेवाओं के लिए आधार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. भारतीय विशेष पहचान प्राधिकरण (यूआईडीए) के सीईओ अजय भूषण पांडे ने कहा कि अब तक की कानूनी समझ के अनुसार उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले के बाद पहचान की पुष्टि के लिए ऑफलाइन विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें : UIDAI ने टेलीकॉम कंपनियों से पूछा - कैसे रुकेगा आधार बेस्ड eKYC, 15 दिन में मांगा जवाब
आधार जारी करने वाला संगठन अब इन पुष्टिकरण तकनीकों के लिए जागरुकता फैलाने का अभियान चलाने की योजना बना रहा है. इसकी शुरुआत अगले सप्ताह प्रौद्योगिकी उद्योग के लोगों के साथ सक्रिय बातचीत के साथ होगी. पांडे ने कहा, “यूआईडीएआई ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के संदर्भ में ऑफलाइन विकल्प पेश किया है. लोग यूआईडीएआई के सर्वर तक गए बिना अपने आधार की पुष्टि करा सकते हैं. इसके लिए उन्हें आधार कार्ड का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण (ई-आधार) डाउनलोड करना होगा...उनके पास अपना आधार नंबर छिपाने का विकल्प भी होगा. उस पर एक क्यूआर कोड होगा, जिसमें आधार नंबर दर्ज नहीं होगा.”
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उन्होंने कहा कि इन विकल्पों के इस्तेमाल के जरिए सेवा प्रदाता किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि कर सकते हैं. इस व्यवस्था में वन टाइम पासवर्ड जैसे सुरक्षा फीचर को शामिल किया जा सकता है.
यूआईडीए प्रमुख ने कहा, “हमारी कानूनी टीम के साथ चर्चा के बाद अब तक हमारी समझ यह है कि यह उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुरूप है. सबसे अहम बात यह है कि इसके जरिए केवल नाम, पता और फोटो जैसे विवरण दिये जाते हैं. ये विवरण अन्य पहचान दस्तावेजों पर भी उपलब्ध होते हैं. आधार नंबर को छिपाया जा सकता है या संशोधित किया जा सकता है. इससे निजता संबंधी चिंताओं का निवारण होता है.”
(इनपुट भाषा से)
उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के संदर्भ में यह बयान जारी किया है. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कई सेवाओं के लिए आधार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. भारतीय विशेष पहचान प्राधिकरण (यूआईडीए) के सीईओ अजय भूषण पांडे ने कहा कि अब तक की कानूनी समझ के अनुसार उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले के बाद पहचान की पुष्टि के लिए ऑफलाइन विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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आधार जारी करने वाला संगठन अब इन पुष्टिकरण तकनीकों के लिए जागरुकता फैलाने का अभियान चलाने की योजना बना रहा है. इसकी शुरुआत अगले सप्ताह प्रौद्योगिकी उद्योग के लोगों के साथ सक्रिय बातचीत के साथ होगी. पांडे ने कहा, “यूआईडीएआई ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के संदर्भ में ऑफलाइन विकल्प पेश किया है. लोग यूआईडीएआई के सर्वर तक गए बिना अपने आधार की पुष्टि करा सकते हैं. इसके लिए उन्हें आधार कार्ड का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण (ई-आधार) डाउनलोड करना होगा...उनके पास अपना आधार नंबर छिपाने का विकल्प भी होगा. उस पर एक क्यूआर कोड होगा, जिसमें आधार नंबर दर्ज नहीं होगा.”
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उन्होंने कहा कि इन विकल्पों के इस्तेमाल के जरिए सेवा प्रदाता किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि कर सकते हैं. इस व्यवस्था में वन टाइम पासवर्ड जैसे सुरक्षा फीचर को शामिल किया जा सकता है.
यूआईडीए प्रमुख ने कहा, “हमारी कानूनी टीम के साथ चर्चा के बाद अब तक हमारी समझ यह है कि यह उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुरूप है. सबसे अहम बात यह है कि इसके जरिए केवल नाम, पता और फोटो जैसे विवरण दिये जाते हैं. ये विवरण अन्य पहचान दस्तावेजों पर भी उपलब्ध होते हैं. आधार नंबर को छिपाया जा सकता है या संशोधित किया जा सकता है. इससे निजता संबंधी चिंताओं का निवारण होता है.”
(इनपुट भाषा से)