बोलीं मायावती, वह जो भी बोलती हैं, उसकी स्पीच खुद ही तैयार करती हैं (फाइल फोटो)
- लखनऊ में आज रैली में मायावती ने कहा कि वह खुद लिखती हैं अपना भाषण
- बोलीं- मुंह से निकले बोल और कमान से निकले तीर कभी वापस नहीं आते
- बसपा सुप्रीमो ने कहा, मैं लिखी हुई बातों को ही सामने रखती हूं
लखनऊ:
लिखे लिखाये भाषण पढ़ने को लेकर अक्सर विरोधियों के निशाने पर रहने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज स्पष्ट किया कि वह अपना भाषण खुद तैयार करती हैं.
दरअसल बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित रैली में मायावती पार्टी नेताओं को नसीहत दे रही थीं कि ‘‘मुंह से निकले बोल और कमान से निकले तीर कभी वापस नहीं आते.’’ उन्होंने कहा कि वरिष्ठ और जिम्मेदार नेताओं को उनकी सलाह है कि देश के वर्तमान राजनीतिक हालात और जातिवादी मानसिकता को ध्यान में रखकर मीडिया में और खुली जनसभा में विशेषकर संवेदनशील मसलों पर अपनी बात लिखित रूप से रखें.
बसपा सुप्रीमो ने कहा, ‘‘मैं लिखी हुई बातों को ही सामने रखती हूं. मुझे अपनी स्पीच (भाषण) खुद तैयार करनी होती है. मेरी स्पीच कोई दूसरा तैयार नहीं करता, मैं खुद करती हूं.’’
मायावती ने कहा कि जब उनकी सरकार थी तो कहा जाता था कि अधिकारी उनकी स्पीच तैयार करते हैं लेकिन चाहे सरकार में रहीं हों या सरकार से बाहर, वह जो भी बोलती हैं, उसकी स्पीच खुद ही तैयार करती हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें दोगुना काम करना पड़ता है. पहले वह अपना भाषण खुद तैयार करती हैं और फिर बोलती हैं ताकि विरोधियों को उनकी पार्टी के खिलाफ बोलने का मौका ना मिल सके.
दरअसल बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित रैली में मायावती पार्टी नेताओं को नसीहत दे रही थीं कि ‘‘मुंह से निकले बोल और कमान से निकले तीर कभी वापस नहीं आते.’’ उन्होंने कहा कि वरिष्ठ और जिम्मेदार नेताओं को उनकी सलाह है कि देश के वर्तमान राजनीतिक हालात और जातिवादी मानसिकता को ध्यान में रखकर मीडिया में और खुली जनसभा में विशेषकर संवेदनशील मसलों पर अपनी बात लिखित रूप से रखें.
बसपा सुप्रीमो ने कहा, ‘‘मैं लिखी हुई बातों को ही सामने रखती हूं. मुझे अपनी स्पीच (भाषण) खुद तैयार करनी होती है. मेरी स्पीच कोई दूसरा तैयार नहीं करता, मैं खुद करती हूं.’’
मायावती ने कहा कि जब उनकी सरकार थी तो कहा जाता था कि अधिकारी उनकी स्पीच तैयार करते हैं लेकिन चाहे सरकार में रहीं हों या सरकार से बाहर, वह जो भी बोलती हैं, उसकी स्पीच खुद ही तैयार करती हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें दोगुना काम करना पड़ता है. पहले वह अपना भाषण खुद तैयार करती हैं और फिर बोलती हैं ताकि विरोधियों को उनकी पार्टी के खिलाफ बोलने का मौका ना मिल सके.
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