
कोरोना वायरस (Coronavirus) संकट और लॉकडाउन (Lockdown) के वित्तीय असर से जूझ रहे वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ एक्सपेंडीचर ने शुक्रवार को एक अप्रत्याशित आदेश जारी कर दिया. पीएम गरीब कल्याण पैकेज और आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत ऐलान की गई योजनाओं को छोड़कर सभी नई योजनाओं के ख़र्च पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है. शुक्रवार को जारी मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि कोविड महामारी की वजह से पब्लिक फाइनेंसियल रिसोर्सेज पर अप्रत्याशित दबाव बढ़ गया है जिसके मद्देनज़र ये फैसला लेना पड़ा है.
तय किया गया है कि कोई भी मंत्रालय किसी भी नई योजना का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को 31 मार्च 2021 तक नहीं भेजेंगे और न ही उन्हें मंजूरी दी जाएगी. सरकार की राजस्व की कमाई किस हद तक घट गई है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल के बजट में घोषित नई योजनाएं भी इस साल शुरू नहीं की जाएंगी.
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया है कि सैद्धांतिक तौर पर बजट में शामिल नई योजनाओं की फंडिंग को भी रोकने का फैसला लिया गया है.
दरअसल कोरोना संकट की वजह से सरकार का राजस्व घटता जा रहा है. सरकार आम तौर पर हर महीने की पहली तारीख को उससे पिछले महीने में हुए जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े जारी करती है. लेकिन पिछले दो महीने से एक मई और एक जून को ये आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं. जीएसटी के आखिरी आकड़े एक अप्रैल को जारी किए गए थे. इसमें कहा गया था कि मार्च 2020 में जीएसटी कलेक्शन 97,597 करोड़ रहा जो फरवरी के 1,05,366 करोड़ जीएसटी कलेक्शन से 7,769 करोड़ कम है. यानी लॉकडाउन का असर जीएसटी कलेक्शन पर दिखना मार्च में ही शुरू हो गया था.
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