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This Article is From Jun 02, 2015

तेज होगी केजरीवाल-एलजी की 'जंग', और राज्यों से भी आ रहे हैं अधिकारी

तेज होगी केजरीवाल-एलजी की 'जंग', और राज्यों से भी आ रहे हैं अधिकारी
फाइल फोटो
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार अपनी एंटी करप्शन ब्रांच में छह बिहार पुलिस के अधिकारी नियुक्त करने पर एलजी की और से आपत्ति झेल चुकी है, लेकिन दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच के सूत्रों की मानें तो मामला केवल यहीं नहीं रुकने वाला।

सूत्रों के मुताबिक़, दिल्ली सरकार उत्तर प्रदेश से 15 ,पश्चिम बंगाल से 15, और उत्तराखंड से चार इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी मांग रही है और इस विषय पर बातचीत जारी है।

सूत्रों के मुताबिक, अगले 15-20 दिन में ये अधिकारी एंटी करप्शन ब्रांच को ज्वाइन कर सकते हैं। यानी कुल मिलाकर केजरीवाल अपनी एंटी करप्शन ब्रांच को और मजबूत करने में इस तरह जूटे हैं, जिससे केंद्र सरकार उनके काम में दखल न दे।

इससे पूर्व खबर आई थी कि बिहार पुलिस के छह अधिकारी दिल्ली एसीबी में नियुक्त हो रहे हैं, जिनमें से पांच अधिकारियों के ज्वाइन करने की सूचना भी मिली थी।

उपराज्यपाल के दफ्तर ने बयान जारी कर जताया ऐतराज
उपराज्यपाल नजीब जंग के दफ्तर ने बयान जारी कर इन नियुक्तियों पर ऐतराज जताया है। एलजी दफ्तर के मुताबिक, एसीबी उपराज्यपाल के अधीन है और नियुक्ति के लिए उपराज्यपाल की इजाजत नहीं ली गई।

दिल्ली सरकार का पक्ष
दिल्ली सरकार ने बयान जारी करके कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही एसीबी के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा हल कर दिया है, किसी तरह की कोई दुविधा नहीं है। दिल्ली सरकार देश के सभी ईमानदार अफसरों से एसीबी को मज़बूत करने की अपील करती है। एसीबी पर क़ानून एकदम साफ़ है और हाईकोर्ट ने भी इसको सही ठहराया है।

मनीष सिसोदिया बोले, इसमें क्या दिक्कत है?
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास पूरी पावर है। और एसीबी के पास भी पूरी पावर है। केंद्र सरकार संविधान का मजाक न बनाए। पहले भी एसीबी में अफसर अलग-अलग जगहों से आते रहे हैं, आगे भी आते रहेंगे। इसमें दिक्कत क्या है।

इस मुद्दे पर क्या कहते हैं दिल्ली सरकार के सूत्र
दिल्ली सरकार के सूत्रों के मुताबिक़, बिहार पुलिस के लोगों को दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच में लाने का फैसला करीब दो महीने पुराना है हालांकि इन्होंने एसीबी ज्वाइन पिछले 1-2 हफ्ते में की है।

सरकार सूत्रों के मुताबिक़, अभी तक सचिव स्तर से नीचे के ट्रान्सफर पोस्टिंग मामलों में एलजी का या गृह मंत्रालय का कोई रोल नहीं होता था। इसका बड़ा उदाहरण यह है कि दिल्ली में सरकार गठन के 15 दिन के भीतर ही उत्तर प्रदेश से दो एडीएम स्तर के अधिकारी प्रवीण मिश्रा और कपिल सिंह ने दिल्ली के सीएम और डिप्टी सीएम को ओएसडी के तौर पर ज्वाइन किया। इसमें क्योंकि काडर उत्तर प्रदेश का है इसलिये केंद्र या एलजी का कोई रोल नहीं होता और न ही उनको कोई आपत्ति हुई।

दिल्ली सरकार के मुताबिक़, ठीक इसी तरह इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी की ट्रान्सफर पोस्टिंग दिल्ली सरकार के हाथ में थी जब तक कि केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन लाकर सभी स्तर के अधिकारियों की ट्रान्सफर पोस्टिंग के लिए एलजी को सर्वेसर्वा नहीं बताया था और जब मामला कोर्ट में गया तो कोर्ट में न तो केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति की और न ही कोर्ट ने कोई आदेश दिया इसलिए फिलहाल वह अपने रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी।

नीतीश-केजरीवाल मुलाकात के दौरान बनी थी सहमति
माना जा रहा है कि बिहार से पुलिस अधिकारियों के लेने के लिए दिल्ली में नीतीश और केजरीवाल के बीच हुई मुलाकात के वक्त सहमति बनी थी।

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